ओडिशा के मयूरभंज जिले की रहने वाली इस युवा अधिकारी ने 22 साल की उम्र में सिविल सर्विसेज पास कर आईपीएस बनने का गौरव हासिल किया था, लेकिन पिछले साल अगस्त में पारिवारिक कारणों से इस्तीफा देने के बाद अब उनका फैसला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है। आखिर क्या वजह रही कि काम्या ने यह बड़ा कदम उठाया, यह सवाल हर किसी के मन में कौंध रहा है। आइए जानते हैं पूरी कहानी-
आईपीएस के पद इस्तीफा देने के बाद देशभर में चर्चा में आई काम्या मिश्रा राजस्थान के करौली जिले के हिण्डौन सिटी की बहू हैं। उनका विवाह वर्ष 2021 में शहर की कृष्णा कॉलोनी निवासी अपने की बैच के आईपीएस अवधेश सरोज दीक्षित के साथ हुआ था। सार्वजनिक निर्माण विभाग के स्थानीय कार्यालय से वरिष्ठ सहायक से सेवानिवृत बसंत दीक्षित ने बताया कि उनके पुत्र अवधेश की कक्षा 12 तक शिक्षा हिण्डौन में हुई।
इसके बाद अवधेश ने जेईई परीक्षा के माध्यम से वर्ष 2015 में आईआईटी मुम्बई से ऐयरोस्पेस में बीटैक की थी। डिग्री के बाद अवधेश ने जोधपुर की कोचिंग व नासिक के एक कोचिंग संस्थान में 7-8 माह तक जेईई के विद्यार्थियों को पढ़ाया। बाद में खुद यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए।
वर्ष 2019 में दूसरे प्रयास में ही यूपीएससी क्रेक किया। उन्हें बिहार कैडर मिला। हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान अधवेश की मुलाकात अपने बैच की हिमाचल प्रदेश कैडर की ओडिशा निवासी आईपीएस काम्या मिश्रा से हुई। दोनों के परिवारों की सहमति से वर्ष 2021 में उदयपुर में 5 दिवसीय समारोह में अवधेश और काम्या की शादी हुई। इसके बाद काम्या को बिहार कैडर मिल गया।
अवधेश के पिता ने बताया कि काम्या मिश्रा महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पैतृक शहर ओडिशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर की है। वे पिता राजकुमार मिश्रा की इकलौती संतान हैं। पिता का माइनिंग व इस्पात का बड़ा कारोबार है। परिजनों के अनुसार कारोबार को देखते हुए काम्या ने शुरु में ही महज 5 साल एसपी रहने की बात कही थी।
काम्या मिश्रा इस्तीफा देने से पहले बिहार के दरभंगा की ग्रामीण एसपी थी। वहीं, IPS अवधेश बिहार के गोपाल गंज में पदस्थापित है। अवधेश की मां सरोज देवी गृहिणी हैं तथा छोटा भाई अंकित दीक्षित जयपुर में बिजनेस करता है। अवधेश का ननिहाल हिण्डौन में झंडूकापुरा में हैं।