बैठक से बढ़ी कयासों की सियासत
राजनीतिक गलियारों में पहले से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि जयंत पाटिल एनसीपी (एसपी) यानी शरद पवार गुट छोड़ सकते हैं और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, पाटिल ने अब तक इन अटकलों का खंडन किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजित पवार सुबह 8 बजे आम जनता से ज्ञापन स्वीकार करने के बाद बैठक के लिए पहुंचे, जबकि जयंत पाटिल भी उसी समय वहां पहुंचे। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। करीब सुबज 9:40 बजे एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करने पहुंचे। इस बैठक में वरिष्ठ नेता दिलीप वालसे पाटिल और हर्षवर्धन पाटिल भी मौजूद रहे।
उद्धव गुट ने उठाए सवाल
इस बैठक को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा, शिवसेना तोड़ने वाले एकनाथ शिंदे से हमने नाता तोड़ लिया है, हम उनके विधायकों से भी नहीं मिलते और न ही बंद कमरे में बैठकें करते हैं। मगर एनसीपी नेता लगातार एक-दूसरे से मुलाकात कर रहे हैं। बीते कुछ दिनों से जयंत पाटिल के भविष्य के राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हाल ही में शिंदे की शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने दावा किया था कि पाटिल जल्द ही अजित पवार के साथ जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा था, “वह (जयंत पाटिल) शरद पवार गुट में नहीं रुकेंगे। उनका मन वहां नहीं लग रहा है… वह जल्द ही अजित दादा की पार्टी में शामिल होंगे।”
वहीँ, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी संकेत दिए थे कि जयंत पाटिल के मन में कुछ और चल रहा है।
अजित पवार ने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि उन्होंने चीनी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक की थी। उन्होंने कहा हमने चीनी क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर चर्चा करने के लिए बैठक की। रिपोर्ट्स के अनुसार, जयंत पाटिल और शरद पवार के पोते रोहित पवार के बीच मतभेद चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि अजित पवार के शरद पवार से अलग होने के बाद रोहित पार्टी की कमान अपने हाथ में लेना चाहते हैं। इस वजह से जयंत पाटिल और रोहित पवार के बीच तनातनी की खबर है। हालांकि, जयंत पाटिल ने अब तक इन सभी अटकलों को नकार दिया है। लेकिन अजित पवार के साथ उनकी यह मुलाकात राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।