जानिए क्यों खास है सेंटिनल द्वीप
उत्तरी सेंटिनल द्वीप बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का एक हिस्सा है, जिसे भारत सरकार ने जनजातीय आरक्षित क्षेत्र घोषित कर रखा है।
यहां की जनजाति को बाहरी पसंद नहीं, मार डालते हैं
सेंटिनली लोग यहां के मूल निवासी हैं। सेंटिनली लोगों को विलुप्तप्राय जनजातीय समूह माना जाता है। इन्हें दुनिया की अंतिम प्री-नियोलिथिक (नवपाषाणकाल का एक चरण, जो लगभग 12,000 से 8,500 साल ईसा पूर्व) जनजाति माना जाता है। ये बाहरी लोगों को अपना शत्रु समझते हैं और हमला कर देते हैं। कई बार जान भी ले लेते हैं। अमरीकी मिशनरी जॉन चाऊ की नवंबर 2018 में उस समय हत्या कर दी गई थी, जब उन्होंने सेंटिनली लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया था। चाऊ कथित तौर पर सेंटिनली लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था। 2006 में भी दो भारतीय मछुआरों की हत्या कर दी गई थी, जब उनकी नाव गलती से द्वीप के किनारे पहुंच गई थी।
सिर्फ 500 की आबादी
माना जाता है कि सेंटिनली लोग समूहों में रहते हैं। सेंटिनलीज आदिम जीवन शैली का पालन करते हैं और शिकार के लिए तीर-कमान और भालों का प्रयोग करते हैं। जनजाति की महिलाएं अपनी कमर, गर्दन और सिर के चारों ओर फाइबर की डोरी बांधती हैं। पुरुष भी हार और हेडबैंड पहनते हैं, लेकिन कमर पर मोटी बेल्ट के साथ। उन्हें कभी-कभी उत्तरी सेंटिनल के तट पर देखा जाता है। इनकी कुल आबादी करीब 500 होने का अनुमान है।