आपकी बात…सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स विवादास्पद कंटेंट पर किस तरह से अंकुश लगा सकते हैं ?
पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं। प्रस्तुत हैं पाठकों के कुछ विचार…


स्पष्ट हों नीतियां और दिशानिर्देश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नीतियों और दिशानिर्देशों को स्पष्ट करना चाहिए ताकि उपयोगकर्ता जान सकें कि कौन सा कंटेंट अनुमति नहीं है। इसके अलावा एआई का उपयोग करके विवादास्पद कंटेंट को पहचानने और हटाने के लिए तकनीकी समाधान विकसित कर सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म उपयोगकर्ताओं को विवादास्पद कंटेंट की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
— कविता बिरम्हान, जयपुर
…………………………………………
कंटेंट चैकिंग का फीचर जोड़ा जाए
सोशल मीडिया प्लेटफार्म के ट्रेंड एनालिसिस का प्रयोग कर उन विषयों की जांच की जा सकती है जो विवाद को जन्म देते है। जिस तरह अखबार न्यूट्रल होकर किसी खबर का प्रकाशन करते हैं उसी प्रकार सोशल मीडिया प्लेटफार्म उन कंटेंट को रोक सकते है जो एकपक्षीय हो। इस हेतु वे कंटेंट चेकिंग का फीचर जोड़ सकते है।
नाम – अन्नू देवडा (जोधपुर)
…………………………………………………….
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अपने स्तर पर ही लगाएं अंकुश
एक बार कही गई बातें कभी वापस नहीं आतीं। इसलिए शब्दों का चयन हमेशा संभाल कर करना चाहिए। चाहे हम कितने भी कड़े नियम बना लें । मानव जाति में नैतिक सिद्धांतों की कमी रहेगी जो कि बचपन के संस्कारों और आसपास के माहौल से बनती है। इसलिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को स्वयं अपने स्तर पर ही अंकुश लगाना होगा।
— कुनाल मिश्रा, रायपुर, छत्तीसगढ़
………………………………………..
सख्त कानूनी कार्रवाई करनी होगी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विवादास्पद कंटेट पर अंकुश लगाने का एकमात्र तरीका है इस पर सतत नजर बनाए रखना। ऐसे कंटेट भेजने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। यदि कोई व्यक्ति दोबारा गलती करे तो उसके मोबाइल फोन को भी जब्त किया जाना चाहिए ।
-वसंत बापट, भोपाल
………………………………………….
AI व मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग जरूरी
सोशल मीडिया प्लेटफार्म को विवादास्पद सामग्री का पता लगाने के लिए AI व मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग करना चाहिए। विवादास्पद कंटेंट की समीक्षा के लिए विशिष्ट सेल की स्थापना करनी चाहिए। प्रभावी व स्पष्ट गाइडलाइंस हों। जिससे फेक न्यूज़ व फेक अकाउंट से निजात मिल सके। सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के विनियमन के लिए सरकार प्रभावी नियम बनाए।
रणवीर बारूपाल, सूरतगढ़ (राजस्थान)
……………………………………………
जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान अनिवार्य
व्यक्ति, परिवार, समाज और देश के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शासकीय निगरानी व नियंत्रण हो। निजता का अर्थ मानसिक प्रदूषण फैलाना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ आधारहीन कथन, लेखन और गलतबयानी नहीं है। बेकसूर व्यक्ति, परिवार, समाज और देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी यदि शासन की है तो कानूनों को बनाने, कानूनों को लागू करने और अपराधियों को सजा देने की जिम्मेदारी भी सरकार की है।
डाॅ. मुकेश भटनागर, भिलाई, छत्तीसगढ
………………………………………………
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का व्यक्तिगत आईडी हो
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का व्यक्तिगत आईडी हो। यह आधार से लिंक हो। उसकी आधार OTP से करना अनिवार्य हो। पेज पर विवादास्पद कंटेंट आते ही व्यक्ति विशेष का पेज लॉक हो जाए। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो।
— सुभाष डूडी, वरिष्ठ पुस्तकालय अध्यक्ष, जिला – जोधपुर
……………………………………………….
नियामक एजेंसी का नियंत्रण हो
सोशल मीडिया पर आपत्ति आपत्तिजनक कंटेंट की रोकथाम के लिए किसी नियामक एजेंसी का उस पर कंट्रोल होना चाहिए। आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर साइबर अपराधियों की तरह सख्त कार्यवाही होना चाहिए।लोगों को भी इस पर पोस्ट साझा करने के पहले अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए।
— ललित महालकरी, इंदौर
………………………………………….
Hindi News / Opinion / आपकी बात…सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स विवादास्पद कंटेंट पर किस तरह से अंकुश लगा सकते हैं ?