उज्जैन में लगे पिछले कुंभ मेला यानि सिंहस्थ 2016 में करीब 7 करोड़ श्रद्धालु आए थे। तब यहां अधोसंरचना विकास पर 632.86 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। सिंहस्थ-28 में जरूरतें चार गुना बढ़ेंगी। ऐसे में अस्थायी सड़क, पानी, बिजली आदि करीब 2000 करोड़ रुपए पर खर्च होंगे।
उज्जैन में सिंहस्थ के लिए मेला क्षेत्र में अब तक आधारभूत सुविधाओं के लिए अस्थायी निर्माण किए जाते रहे हैं। सिंहस्थ 2016 में 632 करोड़ खर्च किए गए लेकिन सिंहस्थ खत्म होने के बाद इनका कोई उपयोग नहीं हुआ था। वर्ष 15-16 के बाद इन्फ्लेशन में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई वहीं सिंहस्थ-28 में 30 करोड़ से अधिक लोगों के मान से व्यवस्था जुटाना होगी, यानि मांग चार गुना से ज्यादा बढ़ जाएगी। ऐसे में यदि इस बार भी सिंहस्थ मेला क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के लिए अस्थायी निर्माण किए गए तो यह खर्च 1500 से दो हजार करोड़ तक पहुंच सकता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि इतनी बड़ी है कि इसमें 10-15 प्रतिशत वृद्धि कर स्थायी प्रबंध व पक्के निर्माण किए जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए अभी अधिकृत एस्टीमेट तैयार नहीं हुआ है।
पक्के निर्माण की योजना
राज्य सरकार ने सिंहस्थ-28 को देखते हुए मेला क्षेत्र में स्थायी अधोसंरचनाओं के लिए स्प्रिचुअल सिटी विकसित करने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत लैंड पूलिंग कर क्षेत्र में पक्की सडक़, पानी की लाइन, सीवर लाइन, अंडरग्राउंड बिजली लाइन, इलेक्ट्रिक पोल आदि स्थायी रूप से लगाए जाएंगे। हालांकि किसान इसका विरोध करते हुए अपनी जमीनें देने से इंकार कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने सिंहस्थ-28 को देखते हुए मेला क्षेत्र में स्थायी अधोसंरचनाओं के लिए स्प्रिचुअल सिटी विकसित करने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत लैंड पूलिंग कर क्षेत्र में पक्की सडक़, पानी की लाइन, सीवर लाइन, अंडरग्राउंड बिजली लाइन, इलेक्ट्रिक पोल आदि स्थायी रूप से लगाए जाएंगे। हालांकि किसान इसका विरोध करते हुए अपनी जमीनें देने से इंकार कर रहे हैं।
सिंहस्थ 2016 में 632.86 करोड़ किया खर्च
- पेयजल व्यवस्था, सीवर लाइन- 163 करोड़ रुपए
- इलेक्ट्रिक व्यवस्था- 101 करोड़ रपए
- टॉयलेट, सफाई, टैंट आदि पर- 315 करोड़ रुपए।
- कच्ची सड़क, लेवलिंग- 20 करोड़ रुपए
- टैंट व पार्किंग- 30 करोड़ रुपए
- जिला पंचायत के टैंट- 3.86 करोड़ रुपए