पुलिस के अनुसार, जेल के अंदर लगे मोबाइल सिग्नल जैमर को निष्क्रिय करने के बहाने यह समूह जेल परिसर में पहुंचा था। जब जेल अधिकारियों ने समय पर उनकी दलीलों का जवाब नहीं दिया, तो पार्टी कार्यकर्ता भड़क गए और जेल परिसर में उत्पात मचाने लगे।
जेल अधिकारियों ने बताया कि मेंगलूरु दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र के विधायक वेदव्यास कामथ के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जेल का मुख्य दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने उन्हें जेल में घुसने से रोक दिया।
विधायक कामथ ने कहा, जेल के अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है, जब जेल के अंदर मोबाइल फोन प्रतिबंधित हैं तो जेल के अंदर जैमर लगाने की क्या जरूरत है? हम समझते हैं कि कुछ अधिकारियों को अपने फोन का इस्तेमाल करने की जरूरत है, जो बिना किसी बाधा के किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, जैमर शहर के मुख्य इलाके में 3 किलोमीटर के दायरे में सामान्य सेलुलर टेलीफोनी को रोक रहा था, जिससे यूपीआई और डेबिट कार्ड से भुगतान जैसे व्यावसायिक लेन-देन प्रभावित हो रहे थे। यहां तक कि जिला न्यायालय भी जैमर की जद में है और अधिवक्ता, न्यायालय के अधिकारी और न्यायाधीश सेलुलर फोन का इस्तेमाल करने से रोके गए हैं।
कामथ ने कहा, हमने बुधवार को जेल अधिकारियों से जैमर को निष्क्रिय करने के लिए कहा था और उन्हें जैमर को बंद करने के लिए दो दिन का समय दिया था। लोगों की शिकायत के बाद, हमने शनिवार को इसे खुद करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि वे आगे की जांच करेंगे और अगर जेल अधिकारी जैमर को निष्क्रिय नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
उनका कहना है कि जेल के अंदर मोबाइल सिग्नल जाम करने की घटना से ही पता चलता है कि जेल अधिकारी कैदियों को नियंत्रित करने में असमर्थ हैं। जेल अधिकारियों की ओर से यह गंभीर चूक है और इसे पुलिस महानिदेशक (कारागार) और गृह मंत्री जी परमेश्वर के संज्ञान में लाया जाएगा।