उसकी मौत से एक तरफ जहां परिवार का कमाऊ पूत चला गया तो दूसरी ओर उसकी पत्नी को अब यह चिंता है कि वह अपने तीन मासूमों का पेट कैसे पालेगी। सुरताराम दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था, अब उसकी मौत पर पत्नी लीलादेवी पर तीनों बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई है। सुरताराम के माता-पिता की मौत हो चुकी थी। परिवार में कमाने वाला सुरताराम अकेला ही था।
सुरताराम की बड़ी बेटी केसी छह साल
सुरताराम की मौत से तीन मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया। सुरताराम की बड़ी बेटी केसी छह साल की है, जबकि कृष्णा चार वर्ष की। सुरताराम का इकलौता बेटा विक्रम दो साल का है। मदद की दरकार
सुरताराम के परिवार को अब मदद की दरकार है। ऐसे में सरकार व किसी सामाजिक स्तर पर सहायता मिले तो ही परिवार की रोटी की चिंता मिटे। कोई सामाजिक संगठन आगे आकर आर्थिक मदद करते हैं तो आहत परिवार को राहत मिलेगी।