एमपी में कर्मचारियों, अधिकारियों की बढ़ गई सेलरी, नए वित्तीय वर्ष में भर जाएगी जेब
राज्य आजीविका मिशन में हुए फर्जीवाड़े में पूर्व आइएफएस अफसर ललित बेलवाल की मुश्किलें और बढ़ गईं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की प्राथमिक जांच में बेलवाल, विकास अवस्थी और सुषमा रानी शुक्ला का अपराध प्रमाणित हो गया। उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज की। ईओडब्ल्यू ने फरवरी में भूपेंद्र प्रजापति की शिकायत पर पीई दर्ज कर भ्रष्टाचार की जांच शुरू की थी।सरकार में दबदबा
सरकार में ललित बेलवाल का सिक्का चलता था। वे 2018 में रिटायर्ड हुए। इसके बाद कांग्रेस की सरकार आई। सरकार जाते ही 2020 में बेलवाल को संविदा पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार सौंपा गया। 2023 में बेलवाल ने इस्तीफा दिया। जुलाई 2023 में दिग्विजय ने तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था।नोटशीट में जोड़ा एचआर मैन्यूअल
तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी बेलवाल ने मिशन की एचआर पॉलिसी में फर्जीवाड़ा किया। 24 मार्च 2015 को आजीविका फोरम की कार्यकारिणी में मंजूर एचआर पॉलिसी में एचआर मैन्यूअल का जिक्र नहीं था। बाद में बेलवाल की नोटशीट में इसे जोड़ा।आईएएस नेहा मारव्या भी एक बार फिर चर्चा में
पूर्व आईएफएस ललित बेलवाल के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद आईएएस नेहा मारव्या भी एक बार फिर चर्चा में आ गईं हैं। 2011 बैच की आईएएस मारव्या ने ही बेलवाल के भर्ती में फर्जीवाड़ा करने के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की अनुशंसा की थी। पीसीसीएफ पद से रिटायर हुए ललित बेलवाल पर सख्त रूख दिखाने की वजह से मारव्या को मप्र राज्य रोजगार गारंटी परिषद के एडीशनल सीईओ पद से आननफानन में हटाकर राजस्व विभाग में उप सचिव बना दिया गया था।एमपी के गुना में बीजेपी नेताओं ने अनुशासनहीनता पर दी सिंधिया की दुहाई, दोफाड़ हुई पार्टी
मारव्या ने अपनी जांच रिपोर्ट में बेलवाल के फर्जी तौर-तरीकों का स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया। रिपोर्ट में उन्होंने लिखा कि बेलवाल सुषमा रानी शुक्ला पर पूरी तरह मेहरबान थे। उन्होंने सुषमा रानी के दर्जनभर परिजनों, रिश्तेदारों आदि को पूर्णतः गलत तरीके से नियुक्ति दी। नियुक्ति के बाद मनमाने तरीके से वेतन भी बढ़ाते रहे। सुषमा रानी के पति देवेन्द्र मिश्रा, उनकी बहन अंजू शुक्ला, आकांक्षा पांडे आदि को भी नौकरी दी गई। जांच रिपोर्ट राज्य के तत्कालीन पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री को भी भेजी गई थी।