ग्रामीणों के अनुसार, इसका निर्माण अर्धरात्रि में हुआ था, और यह स्थान कभी घने जंगलों से घिरा हुआ था। जंगल के कारण यहां कोई भी आने-जाने से कतराता था। समय के साथ, मंदिर का आवरण काला पड़ गया और इसे करिया मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। लोक मान्यता के अनुसार, मंदिर का नाम करिया
मंदिर इसीलिए पड़ा क्योंकि समय के साथ यह काले रंग का हो गया था। यह मंदिर स्थानीय मान्यताओं और आस्था का प्रतीक बन गया है।
मंदिर के अंदर है एक रहस्यमयी सुरंग
मंदिर के पुजारी व व्यवस्थापक पंडित उत्तम अवस्थी ने बताया कि उनका परिवार 3 पीढ़ी से मंदिर की सेवा कर रहा है। सर्वप्रथम उनके दादा स्व. पंडित दीनदयाल अवस्थी ने मंदिर की सेवा प्रारम्भ की थी। मंदिर के अंदर एक रहस्यमयी सुरंग है इसमें पानी भरने पर उसका स्तर नहीं बढ़ता। इसके अलावा, एक समय यहां नाग-नागिन का जोड़ा देखा गया था, जिन्हें मारने के बाद सरोवर का पानी लाल हो गया था। इस घटना के बाद मंदिर की महिमा गांव में फैल गई और यहां भोलेनाथ की पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मंदिर के अंदर स्थित सुरंग के रहस्य के बारे में दादा स्व. दीनदयाल अवस्थी कहा करते थे कि इस सुरंग का पानी कभी नहीं भरता था। यह सुरंग आज भी मौजूद है और इसके साथ ही मंदिर की अद्भुत महिमा भी बरकरार है।
आज मेले में लगेगा श्रद्धालुओं का तांता
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर प्राचीन करिया मंदिर भरनी में प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी विशेष मेला लगेगा। साथ ही विशेष पूजा मध्यरात्रि 12 बजे होगी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ महादेव के दर्शन के लिए इकट्ठी हो जाती है। शहर से बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं । वर्तमान में मंदिर में प्रत्येक सोमवार को तथा विशेष त्योहारों पर शिव जी का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
रात से ही लग जाती है श्रद्धालुओं की कतार
कालेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता यह है कि नि:संतान दंपतियों के यहां आने संतान प्राप्ति की मनोकामनापूर्ण होती है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनौती मांगते हैं और उनकी सूनी गोद भर जाती है। महाशिवरात्रि के दिन मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और भक्तजन रात 12 बजे से ही कतार में खड़े हो जाते हैं। मंदिर अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी फैल चुकी है, और दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं।
आज यहां होंगे विशेष आयोजन
महाशिवरात्रि पर मध्य नगरी चौक शिव मंदिर, सरकंडा नंदीश्वर मंदिर, तिफरा अयप्पा मंदिर, सदर बाजार घोंघा बाबा मंदिर, तिलक नगर श्रीराम मंदिर, और चांटीडीह शिव मंदिर में विशेष तैयारियां की गई हैं। शिव मिलन मेला: रघु विहार मेडिटेशन ट्रेनिंग सेंटर में शिव मिलन मेला लगेगा। जहां विविध सामग्रियों से बने शिवलिंग के दर्शन होंगे चांटीडीह मेला: चांटीडीह शिव मंदिर में पूजा-अर्चना होगी और मेला लगेगा। यह मंदिर शहर का सबसे पुराना शिव मंदिर है।
पीताम्बरा पीठ: सरकंडा स्थित पीतांबरा पीठ में सुबह 6 बजे से महारुद्राभिषेक की शुरुआत होगी, जो शाम तक चलेगा। नि:शुल्क रुद्राक्ष का वितरण भी किया जाएगा। बोलबम सेवा समिति: देवरीखुर्द के गदा चौक में बोल बम सेवा समिति द्वारा रुद्राभिषेक का आयोजन सुबह 8 बजे से किया जाएगा। 1 बजे से भोग वितरण फिर शाम 7 बजे से जागरण होगा।
महाकाल सेना: महाकाल सेना का महाशिवरात्रि उत्सव सीएमडी कॉलेज ग्राउंड में शाम 7 बजे से शुरू होगा। रेलवे क्षेत्र के महाकाल मैदान में भंडारा होगा, 28 फरवरी को शोभायात्रा निकलेगी। आनंदो निकेतन कुटीपारा में: मोपका स्थित आनंदो निकेतन कुटीपारा में सुबह 9.30 बजे से महादुग्धाभिषेक होगा। 3 बजे तक भजन और भोग प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
मोपका क्षेत्र में ही सुबह 9 बजे रुद्राभिषेक, 12 बजे शिव पालकी यात्रा, शाम को शिव बारात निकाली जाएगी। ब्रह्माकुमारी केन्द्र तिफरा: तिफरा बाजार चौक में 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन की व्यवस्था की गई है। यहां प्रयागराज का संगम जल और प्रसाद वितरण भी किया जाएगा।
नंदीश्वर सार्वजनिक शिव मंदिर: नंदीश्वर सार्वजनिक शिव मंदिर जोरापारा, सरकंडा में महारुद्राभिषेक होगा। भंडारा भी लगेगा। लक्की चंदन सेवा समिति: लक्की चंदन सेवा समिति तिलकनगर द्वारा रुद्राभिषेक, रक्तदान शिविर और प्रसाद वितरण होगा।
बंगालीपारा गली नं. 3, शिव मंदिर में महाभिषेक व विशेष पूजन, अर्चन लखहर आरती की जाएगी।