इसके लिए बोर्ड अतिरिक्त मानदेय के रूप में दसवीं के लिए 14 रुपए तथा बारहवीं के लिए 15 रुपए की राशि प्रति उत्तरपुस्तिका देता है। शिक्षकों का कहना है कि महंगाई के दौर में सब कुछ महंगा हो गया है। ऐसे में बोर्ड को राशि बढ़ाना चाहिए। कम मानदेय के कारण हर कोई शिक्षक आसानी से उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन करना भी नहीं चाहता। लेकिन कार्य नहीं करने पर मिलने वाले विभागीय नोटिस के दबाव के कारण वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता को यह कार्य करना पड़ता है।
मंहगाई के अनुसार बढ़ना चाहिए मानदेय
राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. ऋषिन चौबीसा, जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चौहान, उपशाखा एवं ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र सिंह सोलंकी एवं मंत्री नारायण लाल ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिका जांच के लिए मिलने वाला मानदेय पिछले 13 वर्षों से नही बढ़ाया गया है। बोर्ड को मानदेय बढ़ाते हुए तुरंत भुगतान करना चाहिए। भुगतान में देरी की वजह से मूल्यांकन कार्य से शिक्षकों में अरुचि उत्पन्न हो रही है।
गत सत्र का अब तक नहीं भुगतान
उत्तरपुस्तिका जांच एवं बोर्ड़ से जुड़े कार्यो के लिए शिक्षकों को राशि तुरन्त खर्च करनी पड़ती है।परीक्षा केन्द्र सामग्री प्राप्त करने, उत्तरपुस्तिकाएं लाने व जमा करने, उत्तरपुस्तिका के प्राप्तांकों व प्रायोगिक अंकों की फीडिंग करने सहित कई कार्य शिक्षकों के कंधों पर है। पर, इनका मानदेय समय पर नहीं मिलता है। हालात यह है कि गत सत्र 2023-24 की उत्तरपुस्तिका जांच का मानदेय एक साल गुजर जाने के बावजूद अभी तक नहीं दिया गया है। जबकि, वर्तमान सत्र 2024-25 की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच का कार्य भी प्रारभ हो गया है। वहीं दूसरी ओर प्रायोगिक परीक्षा के परीक्षकों का भी मानदेय बकाया है।
उत्तरपुस्तिका : मूल्यांकन मानदेय
माध्यमिक : 14 रुपए प्रति उत्तर पुस्तिका उच्च माध्यमिक : 15 रुपए प्रति उत्तर पुस्तिका परीक्षा केन्द्र कार्य के लिए मानदेय
केंद्राधीक्षक : 150 रुपए अतिरिक्त केंद्राधीक्षक 110 रुपए वीक्षक : 90 रुपये
निरीक्षण के लिए देय राशि
डीईओ : 2000 रुपए (एक मुश्त) उड़नदस्ता संयोजक : 525 रुपए (प्रति दिवस) उड़नदस्ता सदस्य : 425 रुपए (प्रतिदिवस)