मुनि कमलेश ने कहा, वर्तमान युग में संगठन से बड़ा और कोई धर्म नहीं हो सकता। साधना से सफलता में देरी लग सकती है लेकिन संगठन में दूसरे ही पल सफलता मिलती है। राष्ट्रसंत ने कहा कि किसी भी नाम से संगठन हो, उसका लक्ष्य समन्वय, प्रेम और एकता हो तो वह पूजनीय है।
4 अप्रेल को जैन स्थानक में होंगे प्रवचन
जैन संत ने कहा कि जाति, पंथ, प्रांत, संकीर्ण विचारों के संगठन मानव-मानव में खाई पैदा करते हैं। विचारों का टकराव परमाणु बम से भी खतरनाक है। गदक श्रावक संघ के पदाधिकारियों ने विहार सेवा का लाभ लिया। 4 अप्रेल को जैन स्थानक में प्रवचन होंगे।