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आज पति-पत्नी खेलते हैं होली, ऐसे निभाते हैं 200 साल पुरानी परंपरा दान राशि गिनती के दौरान एसडीएम गोरखपुर जनपद पंचायत के अधिकारियों सहित मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश प्रसाद दुबे, सहायक पुजारी भूरेलाल दुबे, नितिन दुबे, देवी सिंह राजपूत, श्यामलाल कोरी, श्यामसुंदर मेहरा, जमुनाप्रसाद, रोहणी सेन व अन्य मौजूद थे।
छह घंटे चली गिनती
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि गोरखपुर एसडीएम कार्यालय के कर्मियों, अफसरों व मंदिर से जुड़े अन्य लोगों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली गईं। खुलने के बाद सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक करीब 125 लोगों ने दान राशि के नोटों की गिनती की। दान राशि बैंक अधिकारियों को सौंप दी गई है। इसके अलावा दान पेटियों से सोना-चांदी भी निकला। अधिकृत पारखी ने जेवरों की परख व तोल की। इस दौरान सोने की नथ, बालियां, बेदी व अन्य छोटे आभूषण करीब सवा तोले के मिले। कमरबंद, पायल, बिछिया सहित दो किलो चांदी के आभूषण पेटी से निकले। ये भी पढें
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गिनती में शामिल मंदिर प्रबंधन के लोगों ने बताया कि दानराशि की गिनती में 12 लाख 86 हजार 031 रु नकदी निकली। वहीं कार्यालय में रसीद से प्राप्त दान राशि 3 लाख 76 हजार 41 रुपए निकली। हैरानी की बात यह है कि बंद हो चुके पुराने एक हजार रुपए के दो नोट भी दानपेटी से निकले। त्रिपुर सुंदरी को भक्तों ने करीब सवा तोला सोना केगहने व दो किग्रा से अधिक चांदी भी अर्पित की। मालूम हो कि इसके पूर्व गत शारदेय नवरात्र के पहले अक्टूबर 2024 में दानपेटियां खोली गई थीं।
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गिनती करने वालों ने बताया कि दानपेटियों से निकले कई नोटों में कागज की पर्चियां भी लिपटी हुई थीं। इनमें देवी से तरह-तरह की अर्जियां लगाई गई थीं। किसी ने लिखा था कि उसका विवाह करवा दो मां, तो किसी ने लिखा था धंधा चलने लगा माता, थैंक्स। एक भक्त ने पुत्री की कामना भी लिखी थी।