राजस्थान पत्रिका ने डांस लोर, रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद, खेलते समय या अन्य सामान्य गतिविधि करते हुए साइलेंट हॉर्ट अटैक से मौत के मामले सामने आने के बाद पड़ताल की। प्रदेश में कार्डियक सुविधाओं वाले सरकारी व निजी अस्पतालों के आंकड़े जुटाए तो 100 प्रतिशत ब्लॉकेज के साथ अस्पताल पहुचंने के मामले तेजी से बढ़ने के कई केस सामने आए। इनमें 40 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में 100 प्रतिशत ब्लॉकेज पाए गए हैं। इनमें से कुछ मरीजों की उम्र मात्र 25 वर्ष थी, जबकि कुछ की उम्र 35 और 40 वर्ष थी।
100% ब्लॉकेज के साथ पहुंचे मामले
34 वर्षीय एक पुरुष को 30 मिनट से सीने में दर्द और भारीपन की शिकायत के साथ निजी अस्पताल में ले जाया गया। ईसीजी से तीव्र संकेत मिला। मरीज को दोपहर 12:45 बजे भर्ती कराया गया। भर्ती होने के बाद ईको जांच की गई। कोरोनरी एंजियोग्राफी से 100 प्रतिशत घाव का संकेत मिला। मरीज को तुरंत प्राथमिक एंजियोप्लास्टी के लिए ले जाया गया। भर्ती होने के 20 मिनट के भीतर दोपहर 1:05 बजे इस अवरुद्ध एलएडी धमनी को खोला गया। इस मरीज की जान बचाने में सफलता मिली।
मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा समस्या
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.जी.एल.शर्मा के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंचने वाले मामलों में जाने बचाने में सफलता मिलती है। युवाओं में इसके कई कारण हैं। आहार, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मानसिक तनाव। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.दीपक माहेश्वरी और डॉ.शशि मोहन शर्मा के अनुसार लगातार काम, फास्ट फूड और खराब-खान-पान इसके बड़े कारण हैं।