प्रेमचंद बैरवा ने विपक्ष पर किया हमला
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता प्रेमचंद बैरवा ने जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल और केवल लोगों को भड़काने का काम करते हैं। वक्फ संशोधन विधेयक किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे समाज के हित में लाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी धर्मों और समाज के हर वर्ग के हित में काम कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष बिना किसी आधार के लोगों को भड़काने का काम करता है। आगे कहा कि विपक्ष इस बिल पर राजनीति कर रहा है, जबकि इसका मकसद वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और उनके दुरुपयोग को रोकना है।
दरगाह के उत्तराधिकारी ने किया समर्थन
इस बीच, अजमेर दरगाह प्रमुख के उत्तराधिकारी और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ संशोधन विधेयक का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों की पुरानी खामियों को दूर करेगा और उनकी लूट को रोकेगा। चिश्ती ने कहा कि हम लंबे समय से इस संशोधन का इंतजार कर रहे थे। यह बिल पारित होने से वक्फ संपत्तियों के सही प्रबंधन में मदद मिलेगी और गरीब मुसलमानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
लोकसभा में बिल पर 8 घंटे की चर्चा तय
सोमवार दोपहर संसद में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने पेश किया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया है। इसमें एनडीए को 4 घंटे 40 मिनट और विपक्ष को बाकी का समय मिला है। विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे ‘समुदाय विशेष के खिलाफ’ बताया है। वहीं, सरकार का कहना है कि बिल केवल पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लाया गया है और इसका किसी धर्म या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें, वक्फ संशोधन विधेयक पर आज देर रात तक मतदान होने की संभावना है। यदि यह बिल लोकसभा में पारित हो जाता है, तो इसे राज्यसभा में भेजा जाएगा।
क्या है वक्फ संशोधन विधेयक 2025?
गौरतलब है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन पर केंद्रित है। सरकार का दावा है कि इससे भ्रष्टाचार और संपत्तियों की हेराफेरी पर रोक लगेगी। इसमें वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और उनके सही इस्तेमाल के लिए नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। विपक्ष का तर्क है कि इससे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता प्रभावित होगी।