क्या है पूरा मामला
एसटीएफ (STF) ने एक फर्जी रजिस्ट्री कराने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया था, जिसमें बिल्डरों और एलडीए के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी। इस मामले में एलडीए के तीन रिटायर्ड और चार कार्यरत कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर हुई है। शुरुआती जांच में छह कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि अन्य पर भी जल्द ही गाज गिर सकती है।
कैसे चलता था फर्जीवाड़ा
- बिल्डरों और एलडीए के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्लॉट और फ्लैटों की रजिस्ट्री की जाती थी।
- आम लोगों की जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए बिल्डरों को ट्रांसफर किया जाता था।
- इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी होती थी, जिसमें एलडीए के कई अधिकारियों और बाबुओं की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
कौन-कौन हैं जांच के दायरे में
- तीन रिटायर्ड कर्मचारी जो अपने कार्यकाल के दौरान फर्जी रजिस्ट्री घोटाले में लिप्त थे।
- चार मौजूदा कर्मचारी, जिनकी भूमिका इस पूरे घोटाले में संदिग्ध है।
- बिल्डर लॉबी, जिनकी मदद से ये घोटाला बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया।
- एलडीए के बाबू और अन्य स्टाफ, जिनकी मिलीभगत के बिना यह घोटाला संभव नहीं था।
अब आगे क्या
- सतर्कता जांच (Vigilance Inquiry) के आदेश दिए गए हैं।
- दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
- एसटीएफ द्वारा और कर्मचारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
- एलडीए में चल रही सभी पुरानी रजिस्ट्रियों की जांच के लिए फाइलें मंगाई गई हैं।
सरकार का सख्त रुख
योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठा रही है। पहले भी कई सरकारी विभागों में बड़े घोटाले उजागर हुए हैं, जिनमें अधिकारियों और बाबुओं पर गाज गिरी है। एलडीए में चल रहे इस घोटाले पर भी सरकार की पैनी नजर है, और दोषियों पर जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जनता को कैसे हुआ नुकसान
- फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्लॉट और फ्लैट हड़पे गए।
- जिन लोगों ने जमीन खरीदी थी, वे कानूनी पचड़ों में फंस गए।
- एलडीए की साख पर बट्टा लगा, जिससे आम जनता का भरोसा कम हुआ।
- बिल्डरों की मिलीभगत से गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों की संपत्ति छीनी गई।
एलडीए में फर्जी रजिस्ट्री घोटाले का खुलासा होने के बाद अब भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और सतर्कता जांच के आदेश दे दिए हैं। अगर जांच में आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।