हवा भरते ही फूटा फुटबाल, खेल सामग्री की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
स्कूलों में पहुंची खेल सामग्री, जिस सामान की जरूरत, उसका भी नहीं रखा ख्याल, राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से सप्लाई किए जा रही खेल सामग्री में कई खेलों का सामान नहीं
नागौर. राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर की ओर से सरकारी स्कूलों में खेल सामग्री का बजट देने की बजाए इस बार मुख्यालय स्तर से सीधा खेल सामान पहुंचाया जा रहा है। एक तो खेल सामान सप्लाई करने का काम सत्र पूरा होने पर किया जा रहा है और दूसरा खेल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूलों में सप्लाई की गई खेल सामग्री की गुणवत्ता देखकर शारीरिक शिक्षकों के साथ खिलाड़ी भी मायूस हो गए हैं, क्योंकि न तो स्कूलों को जरूरत के अनुसार खेल सामग्री दी गई है और न ही खेलने लायक। जिले की एक स्कूल में तो फुटबाल में हवा भरते ही फट गया और ब्लेडर बाहर आ गया। शारीरिक शिक्षकों का कहना है कि मुख्यालय स्तर पर अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर धांधली हुई है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।
खेलों का नुकसान होना तय जिले के एक शारीरिक शिक्षक ने बताया कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से हर साल उपलब्ध कराई जाने वाली राशि से स्कूलों में जरूरत के अनुसार खेल सामग्री खरीदी जाती थी और उसमें गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता था। इससे राजस्थान में खेलों का रुझान बढा है और खिलाड़ी अपना बेहतर प्रदर्शन करने लगे। लेकिन इस वर्ष राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले खेल किट में ‘बड़ा खेल’ हुआ है। इससे खेल और खिलाड़ी दोनों का नुकसान होना तय है। शारीरिक शिक्षकों का कहना है कि सप्लाई किए गए खेल सामान की गुणवत्ता क्रय मूल्य से कुछ चीजों को छोडकऱ बिल्कुल भी मिलान नहीं कर पा रही है।
स्कूलों में पहुंची खेल सामग्री, जिस सामान की जरूरत, उसका भी नहीं रखा ख्यालइन खेलों को किया दरकिनार स्कूली खेलों में पिछले कुछ वर्षों से कई खेलों को शामिल किया गया है, जिससे एक ओर जहां ज्यादा बच्चों को मौका मिल रहा है, वहीं नए खेलों में कई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं। लेकिन इस बार जो सामग्री सप्लाई की जा रही है, इसमें बॉक्सिंग, जूडो, कुश्ती, नेटबॉल, तैराकी, ताइक्वांडो, कराटे, सेपक टकरा, वूशु, योग, मलखम्भ, वेटलिफ्टिंग, रग्बी फुटबॉल, जिम्नास्टिक, तीरंदाजी, शतरंज, टेबल टेनिस, लॉन टेनिस, रोलर स्केटिंग, राइफल्स शूटिंग, साइक्लिंग जैसे खेलों की पूर्ण रूप से अनदेखी की गई है।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा पत्रिका ने गत 10 मार्च को ही समाचार प्रकाशित कर घटिया खेल सामग्री सप्लाई होने की आशंका जाहिर की थी। स्कूलों में जो सामान सप्लाई किया जा रहा है, उसमें एक भी कम्पनी का नहीं है, सारा सामान लॉकल है, जिसकी गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है।
निर्णय अच्छा, लेकिन गुणवत्ता का नहीं रखा ध्यान राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने मुख्यालय स्तर से खेल सामग्री सप्लाई करने का जो निर्णय किया, वो अच्छा है, लेकिन गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा। कोई भी खेल सामग्री कम्पनी की नहीं है।
– जगदीश इनाणिया, जिलाध्यक्ष, शारीरिक शिक्षक संघ, नागौर
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