डोला सेन अपनी सीट नंबर 151 पर और सुब्रता बनर्जी सीट नंबर 133 पर मौजूद नहीं थे, जिसके कारण नियमों के तहत उनके वोट निरस्त कर दिए गए। नतीजतन, विपक्ष के 95 मतों में से 2 वोट घटाकर कुल 93 मत ही मान्य हुए। ये दोनों सांसद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से हैं, जिसने इस विधेयक के विरोध में मतदान किया था।
राज्यसभा में किस पार्टी ने किसके पक्ष में किया मतदान
- भाजपा और सहयोगी दल: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी सहयोगी पार्टियों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया।
- कांग्रेस: कांग्रेस ने विधेयक के खिलाफ वोट दिया।
- तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी): टीएमसी ने भी विधेयक का विरोध किया, लेकिन इसके दो सांसदों के वोट तकनीकी कारणों से गिने नहीं गए।
- समाजवादी पार्टी (सपा): सपा ने विपक्ष के साथ मिलकर विधेयक के खिलाफ मतदान किया।
- द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके): डीएमके ने भी विधेयक का विरोध किया।
- जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य एनडीए सहयोगी: जद(यू) और एनडीए के अन्य सहयोगियों ने विधेयक के समर्थन में वोट दिया।
बीजेडी ने बदला नंबर गेम
वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पर राज्यसभा में मतदान के दौरान बीजू जनता दल (बीजेडी) ने स्पष्ट रूप से किसी एक पक्ष के साथ मतदान नहीं किया। बीजेडी ने अपने सांसदों को पार्टी व्हिप जारी नहीं किया और उन्हें अपनी अंतरात्मा के अनुसार वोट देने की छूट दी। इसका मतलब है कि बीजेडी के सांसदों ने व्यक्तिगत विवेक के आधार पर मतदान किया, न कि एकजुट होकर किसी खास पक्ष (पक्ष या विपक्ष) के साथ।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि बीजेडी ने शुरू में इस विधेयक का विरोध करने की बात कही थी, लेकिन बाद में अपनी स्थिति में बदलाव करते हुए तटस्थ रुख अपनाया। राज्यसभा में विधेयक 128-95 वोटों से पारित हुआ, जिसमें बीजेडी के सात सांसदों के वोट शामिल थे। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि इन सांसदों ने व्यक्तिगत रूप से पक्ष में या विपक्ष में वोट दिया, क्योंकि पार्टी ने कोई आधिकारिक रुख घोषित नहीं किया था। इसलिए, बीजेडी का मतदान एक समूह के रूप में न तो पूरी तरह पक्ष में था और न ही पूरी तरह विपक्ष में, बल्कि यह उनके सांसदों के व्यक्तिगत निर्णयों पर निर्भर था।
इस तरह, लंबी बहस और मतदान प्रक्रिया के बाद वक्फ संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो गया, लेकिन दो वोटों के निरस्त होने ने चर्चा को और गर्म कर दिया।