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नई दिल्ली

भारत अद्भुत… यहां बड़े से छोटे शहरों तक रात को रोशनी का नेटवर्क

नौ महीने के अनुभव : अंतरिक्ष से वापसी के बाद सुनीता विलियम्स और बुच पहली बार मीडिया से रू-ब-रू

नई दिल्लीApr 02, 2025 / 12:13 am

ANUJ SHARMA

फ्लोरिडा. अंतरिक्ष से भारत कैसा लगता है? कई साल पहले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने इस सवाल के जवाब में कहा था- ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा।’ अंतरिक्ष में 286 दिन बिताकर लौटीं नासा की भारतवंशी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स से यही सवाल पूछा गया तो उन्होंने चहकते हुए कहा, भारत अद्भुत है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रहते हुए हर बार जब हम हिमालय के ऊपर से गुजरे तो बुच विल्मोर ने हिमालय की अविश्वसनीय तस्वीरें खीचीं। अंतरिक्ष से हिमालय का नजारा शानदार है। हमें ऐसा लगता था, जैसे लहरें उठ रही हों और भारत में नीचे की ओर बह रही हों।अंतरिक्ष से वापसी के 14 दिन बाद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर मंगलवार को पहली बार मीडिया से रू-ब-रू हुए। उन्होंने अंतरिक्ष में बिताए नौ महीनों के अनुभव साझा किए। सुनीता ने कहा, अंतरिक्ष से हमने देखा कि भारत में कई रंग हैं। जब आप पूर्व से पश्चिम की तरफ जाते हैं तो वहां के तटों पर मछली पकडऩे वाली नावों का बेड़ा गुजरात और मुंबई के आने का संकेत देता है। भारत में बड़े से छोटे शहरों तक रात को रोशनी का नेटवर्क दिखता है, जो अविश्वसनीय लगता है। उन्होंने कहा कि वह निश्चित तौर पर अपने पिता के देश भारत आएंगी। सुनीता एक्सिओम मिशन पर जाने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, उम्मीद करती हूं कि मैं उनसे किसी समय मिल सकूं। हम भारत में ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ अपने अनुभव साझा कर सकें। भारत महान देश और अद्भुत लोकतंत्र है, जो अंतरिक्ष में अपनी जगह बना रहा है। हम इसमें भारत की मदद करना चाहेंगे।
तीन मील दौड़ी, नई चुनौतियों की तैयारी

सुनीता विलियम्स ने कहा, अब हम नई चुनौतियों के लिए तैयारी कर रहे हैं। मैं कल ही तीन मील दौड़ी हूं। इसके लिए अपनी पीठ थपथपा सकती हूं। उन्होंने कहा, हम जिस मिशन के लिए स्पेस स्टेशन गए थे, हमारा पूरा फोकस उस मिशन को पूरा करने पर था। कभी नहीं लगा कि हम अंतरिक्ष में फंस गए हैं। स्पेस स्टेशन में लगातार रोटेशन फ्लाइट आ रही थी। पूरा यकीन था कि हम घर जरूर लौटेंगे।
कदम लडख़ड़ाए, पर कुछ ही घंटों में बदलाव

विलियम्स ने बताया, नौ महीने बाद जब 18 मार्च को धरती पर कदम रखे तो लडख़ड़ाने लगी थी, लेकिन कुछ घंटों के भीतर ही बदलाव नजर आने लगे। इंसान का दिमाग आसपास की चीजों को जल्दी समझने लगता है। सबसे पहले मैं अपने पति और पालतू श्वानों को हग करना चाहती थी। मेरे पिता शाकाहारी थे। मैंने घर पहुंचने पर सबसे पहले बढिय़ा-सा ग्रिल्ड चीज सैंडविच खाया।
यह भी एक सबक, किसी को दोष नहीं

इस सवाल पर कि वापसी में देर के लिए कौन जिम्मेदार है, बुच विल्मोर ने कहा, मुझे किसी को दोष देना पसंद नहीं है। हम सभी जिम्मेदार हैं। विश्वास बहुत महत्त्वपूर्ण है। हम पीछे मुडक़र नहीं देखेंगे कि इस व्यक्ति या उस इकाई को दोषी ठहराया जाना चाहिए। हम आगे देखेंगे कि इस पूरी प्रक्रिया से सीखे गए सबक का इस्तेमाल कैसे करेंगे, ताकि भविष्य में और सफलता सुनिश्चित हो।

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