गर्भवती धात्री महिलाओं के अनुसार तलावड़ा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र बी पर वे सोमवार सुबह पोषाहार लेने पहुंची तो उन्होंने एक गेट को टूटे देखा और दूसरे गेट पर ताला लटका देखा। इस पर उन्होंने अंदर जाकर देखा तो पोषाहार बिखरा हुआ था। इस पर उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र संचालक को सूचना दी। इस पर संबंधित संचालक ने आकर देखा तो आधा पोषाहार गायब था।
ग्रामीणों के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से संचालित आंगनबाड़ी केंद्र बी पर भालुओं का एक जोड़ा, आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने के बाद रविवार देर शाम को दाखिल हुआ। भालुओं का यह जोड़ा करीब एक सप्ताह से तलावड़ा गांव के आसपास घूम रहा है। सोमवार को भी वह आंगनबाड़ी केंद्र बी की दीवार के पास घूमते नजर आया। वहीं सुबह उसके पंजे भी वहां देखे गए। ऐसे में भालुओं के ही पोषाहार चट करने की पुष्टि की जा रही है।
आए दिन नुकसान पहुंचा रहे भालू
रणथंभौर से सटे गांवों में जंगली भालू आए दिन जंगल से बाहर आकर घूमते फिरते देखे जा रहे हैं। भालुओं के आतंक से ग्रामीण भी बेहद परेशान हैं। बताया जा रहा है कि जंगली भालू घरों के दरवाजे तोड़कर भीतर घुस जाते हैं। पहले भी यह भालू देशी घी सहित अन्य खाद्य सामग्री को खा चुके हैं। भोजन की तलाश में भालू करीब आठ माह से घरों के अंदर घुस रहे हैं।
वन विभाग भालुओं को पूर्व में कर चुका है पिंजरे में कैद
ग्रामीणों ने बताया कि नायपुर, तलावड़ा , सावटा , गोठबिहारी, काछड़ा, बाणपुर खंडार कस्बा इटावदा, इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर सहित आदि गांवों से पूर्व में करीब आधा दर्जन भालुओं को टीम ने पिंजरे में कैद व ट्रेंकुलाइज कर जंगल में छोड़ दिया। इसके बाद भी आबादी इलाकों से भालूओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है।
इनका कहना है…
ग्रामीणों से जानकारी सामने आई है। पूर्व में भी तलावड़ा में पिंजरा लगा दो भालू जंगल की सीमा में छोड़े गए थे। अब फिर से यहां पिंजरा लगाकर भालुओं को जंगल में छुड़वाया जाएगा। शैलेष अग्रवाल, रेंजर, खंडार संबंधित विभाग एलएस चरणजीत कौर को जांच के निर्देश दिए हैं। यहां कितना पोषाहार खराब हुआ है, इस बारे में उनसे जानकारी मांगी गई है।
हितेश सोनी, सीडीपीओ, महिला बाल विकास विभाग।