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पत्रिका को समाज की आनंदी बाई कछावा ने अपने पारंपरिक होली गीतों के पिटारे से चंद लाइनें सुनाई। ‘जरा सो बाहर आजा सांवरिया, अपन खेलां होली… होली खेलांगा तो म्हारा सासूजी लड़ेगा…सासूजी ने मंदिर पहुंचा दो, फिर अपन खेलां होली।’
ऐसी है परंपरा
मारवाड़ी माली समाज के अध्यक्ष मोती भाटी ने बताया, 200 साल से चली आ रही परंपरा निभाने युवाओं में उत्साह है। 7 दिनी होली उत्सव में डांडिया नृत्य किया जा रहा है। सत्यनारायण कछावा ने बताया, परंपरागत होली उर्दूपुरा चौराहे पर शुक्रवार शाम 5 बजे होगी। इस बार पति-पत्नी जोड़े को लकी ड्रॉ से नकद राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।