एमपी के महाराष्ट्र से सटे सीमावर्ती गांवों में शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन को एक साथ खड़ा करते हैं और इसके बाद वे एक दूसरे पर थूकते हैं। इस रस्म को हल्दी उतारना कहा जाता है। इस रस्म के पहले दूल्हा दुल्हन को कहीं बाहर नहीं निकलने दिया जाता।
ज्यादातर गांवों में रस्म निभाने लगे
मुख्यत: महाराष्ट्र में यह रस्म निभाई जाती है। एमपी में बसे देशमुख मराठा समाज में शादी में इस परंपरा का पालन किया जाता रहा जिसे देखकर महाराष्ट्र से सटे प्रदेश के पश्चिमी हिस्से के ज्यादातर गांवों में रस्म निभाने लगे हैं।
कुल्ली करने की यह प्रक्रिया तीन चार बार की जाती है
शादी में दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है। मान्यता है कि हल्दी लग हुए बाहर जाना ठीक नहीं रहता है इसलिए इसे उतारा जाता है। इसके लिए सात फेरों के बाद दूल्हा-दुल्हन को एक साथ खड़ा करते हैं। दोनों को मुंह में चबाने के लिए खोपरा देते हैं फिर दूल्हा दुल्हन मुंह में पानी लेकर एक दूसरे पर थूकते हैं। कुल्ली करने की यह प्रक्रिया तीन चार बार की जाती है जिसके बाद दोनों को स्नान के लिए ले जाते हैं। इसमें दूल्हा-दुल्हन पर सभी परिजन पानी डालते हैं और इस प्रकार उनकी हल्दी उतारी जाती है।