Vengaivayal incident :आखिरकार वेंगैवायल मानव अपशिष्ट मामले के तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
चेन्नई. पुदुकोट्टै जिले के वेंगैवायल की दलित कॉलोनी को पानी की सप्लाई करने वाली पेयजल टंकी में मानव अपशिष्ट मिलाने के दो साल पुराने मामले में आखिरकार चार्जशीट दायर कर दी गई। इतने अरसे तक पुलिस जांच चलती रही और आरोपियों का खुलासा नहीं किया गया था। अब अपराध शाखा-आपराधिक जांच विभाग (सीबी-सीआइडी) ने शुक्रवार […]
Madras High Court on Anna University sexual assault case
चेन्नई.पुदुकोट्टै जिले के वेंगैवायल की दलित कॉलोनी को पानी की सप्लाई करने वाली पेयजल टंकी में मानव अपशिष्ट मिलाने के दो साल पुराने मामले में आखिरकार चार्जशीट दायर कर दी गई। इतने अरसे तक पुलिस जांच चलती रही और आरोपियों का खुलासा नहीं किया गया था। अब अपराध शाखा-आपराधिक जांच विभाग (सीबी-सीआइडी) ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने 2022 वेंगैवायल मामले में जांच पूरी कर ली है और 20 जनवरी 2025 को तीन व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के.आर. श्रीराम और जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति की पहली खंडपीठ के समक्ष पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता जे. रवींद्रन ने कहा कि सीबी-सीआइडी के अधिकारियों ने तीन आरोपियों की पहचान करने और अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने से पहले 127 गवाहों और 57 दस्तावेजों की जांच की थी।न्यायाधीशों ने एएजी को दोपहर तक हलफनामे के रूप में प्रस्तुतियां देने को कहा, ताकि कुछ जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर आवश्यक आदेश पारित किए जा सकें, जिसमें घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से जांच की मांग की गई थी।बदले के इरादे से की कार्रवाई
सरकार की ओर से पेश शपथपत मेंवेंगैवायल क्षेत्र के सुदर्शन, मुत्तुकृष्णन और मुरलीराजा इस घटना से जुड़े हुए हैं।आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुरलीराजा ने गलत सूचना फैलाई, जबकि सुदर्शन और मुत्तुकृष्णन पानी की टंकी पर चढ़ गए और जानबूझकर पानी में मानव मल मिलाया। तीनों ने यह कांड मुत्तुकाडु पंचायत अध्यक्ष के पति से बदला लेने के इरादे से किया था।
यह है मामला 26 दिसंबर 2022 में पुदुकोट्टै जिले के वेंगैवायल गांव के दलित निवासियों को पेयजल की आपूर्ति करने वाली पानी की टंकी में समाजकंटकों ने मानव मल दिया गया था। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया और इसकी कड़ी निंदा की गई। मामला तूल पकड़ने के बाद जांच जांच स्थानीय पुलिस से सीबी-सीआइडी को सौंप दी गई। लेकिन मामले को सुलझाने में देरी होने के कारण, जनहित याचिका दायर करने वाले के. राजकमल और मार्क्स रवींद्रन उर्फ वी. रवींद्रन ने 2023 में जांच को सीबीआइ को सौंपने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।हाईकोर्ट से कई बार स्थगन मिलने के बाद, सीबी-सीआइडी ने आखिरकार दावा किया कि उसे सफलता मिल गई है और संबंधित क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।
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