scriptपुस्तकोपहार: विद्यार्थियों में सहयोग की भावना जगाने और खर्च कम करने जूनियर को दिला रहे सीनियर की किताबें | Book Gift: To inculcate a sense of cooperation among students and to reduce expenses, juniors are being given books by seniors | Patrika News
छतरपुर

पुस्तकोपहार: विद्यार्थियों में सहयोग की भावना जगाने और खर्च कम करने जूनियर को दिला रहे सीनियर की किताबें

केंद्रीय विद्यालय संगठन ने एक अनूठी पहल की है, जिसमें विद्यार्थी अपनी पुरानी किताबें एक-दूसरे को भेंट करते हैं, ताकि ना केवल किताबों का सही उपयोग हो सके, बल्कि पर्यावरण को भी बचाया जा सके।

छतरपुरApr 03, 2025 / 10:48 am

Dharmendra Singh

book gift

पुस्तक उपहार देते हुए

प्रदेश सरकार हर साल करोड़ों की तादाद में पुस्तकें छाप कर बच्चों को निशुल्क उपलब्ध कराती है। इस प्रयास का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधनों से वंचित न रहें। इसके बावजूद, बढ़ती हुई कीमतों और किताबों की छपाई के लिए आवश्यक कागज के लिए पेड़ों की निरंतर कटाई एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन चुकी है। ऐसे में, केंद्रीय विद्यालय संगठन ने एक अनूठी पहल की है, जिसमें विद्यार्थी अपनी पुरानी किताबें एक-दूसरे को भेंट करते हैं, ताकि ना केवल किताबों का सही उपयोग हो सके, बल्कि पर्यावरण को भी बचाया जा सके।

सकारात्मक संदेश दे रहे


केंद्रीय विद्यालय संगठन की यह पहल न केवल विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह पूरे समाज को एक सकारात्मक संदेश भी देती है। छतरपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय ने इस योजना को 1 अप्रेल से लागू किया है। विद्यालय के प्राचार्य मनीष रूसिया के मार्गदर्शन में यह कदम उठाया गया है, जिसके तहत पुस्तकालय प्रभारी प्रतीक असाटी ने 123 सीनियर छात्रों की पुरानी किताबें स्वेच्छा से जमा कराई। इन किताबों को जूनियर छात्रों को उपहार स्वरूप भेंट दी गई। इसके माध्यम से न केवल किताबों की लागत पर बचत होती है, बल्कि कागज की आवश्यकता भी कम हो जाती है, जिससे पेड़ों की कटाई को रोका जा सकता है।

स्वेच्छा से भी दे सकते हैं


इस योजना के तहत विद्यार्थियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे स्वेच्छा से अपनी पुरानी किताबें किसी अन्य छात्र को दे सकते हैं। अगर किसी विद्यार्थी के पास इस प्रक्रिया में भाग लेने का समय नहीं है, तो कक्षा अध्यापक खुद बच्चों से किताबें जमा करते हैं और फिर उन किताबों को उस कक्षा के अन्य विद्यार्थियों को दे देते हैं, जिनके पास किताबें नहीं होतीं। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को नई किताबें खरीदने की आवश्यकता न पड़े और वे पुराने पुस्तकों का पुन: उपयोग कर सकें।

पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता


यह पहल केवल छात्रों के लिए आर्थिक लाभकारी नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अहम कदम है। पुस्तकें बनाने के लिए जो कागज इस्तेमाल किया जाता है, उसे बनाने के लिए पेड़ों की आवश्यकता होती है। जितना अधिक कागज का उत्पादन होगा, उतना ही अधिक पेड़ों की कटाई होगी। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय विद्यालय ने अपनी पहल में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को भी प्रमुख स्थान दिया है। किताबों का पुन: उपयोग करने से कागज की आवश्यकता में कमी आएगी और साथ ही, अधिक पेड़ों की कटाई भी रोकी जा सकेगी।

किताबों के बढ़ते दामों से मिलेगी राहत


इन पुरानी किताबों के आदान-प्रदान से न केवल छात्रों को नई किताबों की खरीदारी से बचत होगी, बल्कि इस पहल से अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। हाल के वर्षों में किताबों के दामों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे छात्रों के अभिभावकों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ रहा है। इस योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को बिना किसी खर्च के किताबें मिल रही हैं, और इस प्रकार से अभिभावकों को बढ़ती किताबों की कीमतों का बोझ नहीं उठाना पड़ता।

सामाजिक ताने-बाने में मजबूती


इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विद्यार्थियों में सहयोग और आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है। जब सीनियर छात्र अपनी किताबें जूनियर छात्रों को देते हैं, तो यह न केवल एक दान की भावना को बढ़ावा देता है, बल्कि विद्यार्थियों के बीच सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करता है। इस तरह से, छात्र एक-दूसरे की मदद करके, अपने समुदाय को सशक्त बनाते हैं और एक सकारात्मक सोच का विकास करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह योजना छात्रों के बीच जिम्मेदारी और सहयोग की भावना को भी उत्पन्न करती है। विद्यार्थियों को यह अहसास होता है कि वे न केवल अपनी पढ़ाई के लिए जिम्मेदार हैं, बल्कि एक बड़े समुदाय का हिस्सा हैं और एक-दूसरे की मदद करके ही समाज को बेहतर बना सकते हैं।

इनका कहना है


केंद्रीय विद्यालय की पुस्तक उपहार योजना के तहत सीनियर छात्रों की किताबें जूनियर छात्रों को दी जाती हैं। इसका उद्देश्य पुस्तक का सही और ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना और साथ ही पेड़ों की कटाई से बचाना है। यह पहल न केवल छात्रों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण को बचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
मनीष रुसिया, प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय छतरपुर

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