समय से नहीं पहुंचती मदद
एनएचएआई का दावा है कि फोरलेन पर आग की घटनाओं से निपटने के लिए टोल प्लाजा और पेट्रोलिंग वाहनों में फायर फाइटिंग सिस्टम उपलब्ध है। इसके बावजूद सवाल यह उठता है कि जब इन घटनाओं में आग लगने की सूचना दी गई, तो फिर समय पर क्यों कोई मदद नहीं पहुंची? यह घटनाएं फोरलेन पर सुरक्षा की बड़ी कमी को उजागर कर रही हैं, खासकर तब जब राज्य सरकार और एनएचएआई द्वारा वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई सुविधाओं का दावा किया जाता है।
टोल प्लाजा पर सुविधाओं का दावा, लेकिन वास्तविकता अलग
फोरलेन की कुल लंबाई 168 किलोमीटर है, और इस पर तीन प्रमुख टोल प्लाज देवगांव, पचवरा और लोहारा संचालित हैं। एनएचएआई के अधिकारी इन टोल प्लाजों पर एम्बुलेंस, फायर फाइटिंग सिस्टम और क्रेन जैसी आपातकालीन सुविधाओं के उपलब्ध होने का दावा करते हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। पिछले एक माह में पचवारा टोल प्लाजा के क्षेत्र में 11 वाहनों में आग लगने की घटनाएं हुईं, देवगांव में 6 वाहन जलकर खाक हुए और वहीं उत्तरप्रदेश की सीमा में लोहारी टोल प्लाजा के दायरे में 3 वाहन आग के शिकार हो गए। इसके बावजूद किसी भी वाहन में आग लगने की घटना के बाद न तो फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, न ही पेट्रोलिंग टीम ने मदद के लिए समय पर कदम उठाया।
टोल फ्री नंबर पर भी नहीं मिला कोई रिस्पांस
पचवरा, देवगांव और लोहारी टोल प्लाजा के क्षेत्र में हुई इन घटनाओं में से अधिकांश के दौरान स्थानीय हेल्पलाइन और टोल फ्री नंबर 1033 पर कॉल किए गए थे, लेकिन मदद मिली। जानकारी के अनुसार जब वाहन में आग लगी, तो यात्रियों ने तुरंत टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। हाइवे पर वाहनों के बीच हुई इस बड़ी समस्या के बावजूद भी टोल प्रबंधन और पेट्रोलिंग टीम से किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पाई। यह स्थिति यात्रियों और वाहन चालकों को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रभावित कर रही है, क्योंकि उन्हें किसी भी आपातकालीन स्थिति में न तो तत्काल मदद मिलती है, और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
पिछले कुछ दिनों में भी हुए प्रमुख हादसा
बीते सप्ताह पचवरा टोल प्लाजा क्षेत्र में एक जीप में आग लग गई। यह वाहन नागौद के उचेहरा निवासी सज्जी साहू का था, जो अपनी बेटी का तिलक लेकर झांसी से वापस लौट रहे थे। वाहन में आग लगने से दो घंटे तक रास्ता जाम रहा, लेकिन टोल फ्री नंबर पर शिकायत करने के बाद भी कोई मदद नहीं आई। वाहन पूरी तरह से जलकर राख हो गया और यात्रियों को रास्ते में कोई सहायता नहीं मिल पाई। इस घटना से यह साफ होता है कि टोल प्रबंधन सिर्फ वसूली में ही ज्यादा दिलचस्पी रखता है और यात्री सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से लापरवाह है।
समस्या का समाधान जरूरी
एनएचएआई और टोल प्रबंधन की इस लापरवाही को लेकर वाहन चालकों में गहरी निराशा है। सडक़ दुर्घटनाओं और आगजनी की घटनाओं के बाद मदद के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। टोल प्लाजा पर फायर फाइटिंग सिस्टम का दावा किया गया था, लेकिन एक भी घटना में यह सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ।
एनएचएआई अधिकारियों का बयान
इस मामले पर एनएचएआई के पीडी दीपक चापेकर का कहना है कि फोरलेन पर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन घटनाओं के बाद समय पर मदद न मिल पाने के मामले में वे वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएंगे और इस समस्या का समाधान निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
पत्रिका व्यू
एनएचएआई और टोल प्रबंधन की इस गंभीर लापरवाही को लेकर सवाल उठना लाजिमी है कि अगर फायर फाइटिंग सिस्टम और पेट्रोलिंग टीम के पास जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं, तो फिर वह समय पर घटनास्थल पर क्यों नहीं पहुंचते हैं? इस संबंध में और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि यात्रियों को ऐसी अप्रत्याशित घटनाओं के दौरान मदद मिल सके और उनकी जान और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।