कर्मचारी-अधिकारी कर रहे विरोध
रिटायर होने के बाद एक्सटेंशन देने का विभागीय कर्मचारी-अधिकारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर बार निगम दावा करता है कि अफसर विभाग के काम में एक्सपर्ट हैं, इसलिए दोबारा मौका दिया जाता है। हकीकत यह है कि दूसरों को मौका नहीं मिलने के कारण ही ये एक्सपर्ट बने रहते हैं। पिछले कुछ समय से महापौर ने इसे लेकर सख्ती की है।
नगर निगम में एक्सटेंशन के मामले
केस-1: अधीक्षण यंत्री रहे महेश शर्मा को एक्सटेंशन दिया था। केस-2: उद्यान विभाग से रिटायर होने के बाद अफसरदिलीप सिंह चौहान ने तत्कालीन निगमायुक्त हर्षिका सिंह से विभागीय प्रस्ताव तैयार कराया। शासन से अनुमति मिल गई, लेकिन एमआइसी सदस्यों की सहमति नहीं होने से प्रस्ताव पास नहीं हुआ। निगम में नौकरी के दौरान चौहान पर कई गंभीर आरोप लगे, लेकिन विभाग उन्हें फिर से काम करने का मौका देने को राजी था। केस-3: ट्रेंचिंग ग्राउंड प्रभारी रहे भारत सिंह चौहान जून 2024 में रिटायर हुए। रिटायर होने के बाद भी वे बिना एक्सटेंशन नौकरी करते रहे। उन्होंने सरकारी वाहन, मोबाइल सिम और वायरलेस सेट का भी इस्तेमाल किया। दिसंबर में उन्हें एक्सटेंशन दिया गया।
केस-4: हाल ही में रिटायर हुईं प्रभारी अपर आयुक्त लता अग्रवाल को भी एक्सटेंशनदेने की मंशा निगम की है। अग्रवाल के पासमार्केट, रिमूवल सहित कई विभाग थे। विभाग ने नियुक्ति देने का प्रस्ताव एमआइसीबैठक में रखा, लेकिन इस प्रस्ताव पर महापौर सहित अन्य एमआइसी सदस्यों ने उस दिन चर्चा करने से इनकार कर दिया। एमआइसी कीअगली बैठक में इस पर विचार किया जा सकता है। जानकारी है कि आधे से अधिक एमआइसी सदस्य प्रस्ताव के समर्थन में हैं।
केस-5: कुछ समय में जनकार्य विभाग और ड्रेनेज विभाग के अफसर डीआर लोधी और विवेश जैन का रिटायरमेंट होना है। कयास हैं कि इन्हें भी एक्सटेंशन दिया जाएगा। हालांकि लोधी ने इससे इनकार किया है।