खास बात यह भी है कि गरीब परिवारों के लिए बनाए जा रहे ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण लागत की क्रास सब्सिडी की भरपाई नपा को एलआईजी आवासों के विक्रय से करनी है। इन्हीं वजहों से मकान की लागत 9.40 लाख रुपए से बढ़कर 15.50 लाख रुपए हो गई है। प्रियदर्शनी नगर न्यास कॉलोनी के आखिरी छोर पर ईडब्ल्यूएस और आजाद नगर सब्जी बाजार के पास एलआईजी मकान बनाए जा रहे हैं।
ईडब्ल्यूएस आवासों से होगी भरपाई
नपा अध्यक्ष पंकज चौरे ने बताया कि ईडब्ल्यूएस की लागत करीब 7 लाख रुपए आ रही है। हितग्राहियों को नपा बैंक लोन कराकर देगी। इसके बाद करीब 2 लाख रुपए प्रत्येक आवास के शेष बच रहे हैं। ईडब्ल्यूएस कंपलीट करने में करीब 4 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आवश्यकता है। जिसकी भरपाई एलआईजी से होगी। इसी वजह से दुकानों का निर्माण कराया गया है। मकानों की निर्माण लागत भी रिवाइज्ड डीपीआर की वजह से बढ़ी है। 12 दुकानें बनाने का प्रस्ताव शासन को अनुमति के लिए भेजा गया है। रिवाइज्ड डीपीआर में एलआईजी की लागत बढ़ी है। जिसके अतिरिक्त राशि से ईडब्ल्यूएस कंपलीट करेंगे। एलआईजी वालों का एग्रीमेंट भी 16 लाख रुपए का हुआ है। यदि किसी को राशि वापस चाहिए तो नपा राशि भी लौटा रही है। -पंकज चौरे, अध्यक्ष नपा
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वर्ष 2017 में स्वीकृत योजना के तहत 821 ईडब्ल्यूएस और 142 एलआईजी स्वीकृत किए गए थे। यह मकान प्रियदर्शनी नगर, आजाद नगर सब्जी बाजार के पास और बैंक कॉलोनी लाल ग्राउंड में बनाए जाना थे। जिसका 27 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला गया था। दो कंपनियों ने काम लिया, जिसका एग्रीमेंट भी हो चुका था। लेकिन नपा जगह उपलब्ध नहीं करा पाई।
इसमें से एक भूमि का विवाद न्यायालय में पहुंच गया। इसके बाद रिवाइज्ड डीपीआर बनाई गई। जिसमें जमीन के हिसाब से मकानों की संख्या कम कर दी गई। अब 100 मकान प्रियदर्शनी नगर और 96 आजाद नगर में बन रहे हैं। इनमें से 16 मकानों का एक फ्लेट प्रियदर्शनी नगर में बन चुका है।
कलेक्टर से की शिकायत
नपा के पूर्व पार्षद यज्ञदत्त गौर ने कार्यपालन अधिकारी प्रधानमंत्री आवास योजना, कलेक्टर और सीएमओ नपा इटारसी को पत्र लिखकर एएचपी घटक के आवासों का मूल्य बढ़ाकर पात्र हितग्राहियों को लाभ से वंचित करने की शिकायत की है। पत्र में उन्होंने आवेदन के समय इन आवासों का मूल्य 9.40 लाख रुपए दर्शाया गया था। अब 15.50 लाख रुपए कर दिया गया है। एनिम्न आय वर्ग (एलआईजी) के हितग्राही हेतु इतने पैसे की व्यवस्था करना तथा इतना महंगा आवास ले पाना असंभव है। साथ ही ऐसा निर्णय प्रधानमंत्री के लक्ष्य एवं योजनाओं के भी विपरीत है। पत्र में उन्होंने कार्रवाई की मांग की है।