CG News: नक्सलियों ने दोनों ओर से की युद्धविराम की अपील
सेंट्रल कमेटी ने आदिवासियों के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाते हुए भारत सरकार से आग्रह किया है कि
नक्सल प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार को रोका जाए। युद्ध विराम और शांति की पेशकश के साथ-साथ नक्सलियों की ओर से शर्तें भी रखी गई हैं। नक्सलियों ने प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों की ओर से की जा रही कार्रवाई को युद्ध का नाम दिया है।
नक्सलियों की ओर से कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक गहन आपरेशन चला रही हैं, जिसके कारण 400 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें कई कमांडर भी हैं। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गई हैं। पकड़े गए लोगों को भी यातनाएं देकर मारा गया है। इसलिए नक्सलियों ने दोनों ओर से युद्धविराम की अपील की है।
नक्सलियों की शर्त- प्रभावित क्षेत्र से लौटे सुरक्षाबल
नक्सलियों की ओर से जो शर्तें रखी गई हैं, उनमें प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की तत्काल वापसी शामिल है। जारी बयान में कहा गया है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नई सैन्य तैनाती बंद कर दी जाए। साथ ही नक्सल विरोधी अभियानों को रोका जाए और कैंप नहीं खोले जाएं। कहा गया है कि अगर सरकार उनकी मांगों से सहमत होती है तो वे बातचीत में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हैं। नक्सलियों का कहना है कि जैसे ही सरकार सैन्य अभियान बंद कर देगी वे युद्धविराम की घोषणा कर देंगे।
जनता से सरकार पर दबाव डालने कहा
नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने जनता से समर्थन मांगा है और कहा है कि बुद्धिजीवियों को शांति वार्ता के लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए तथा बातचीत के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ा जाना चाहिए। नक्सलियों ने छात्रों, पत्रकारों व आमजन से इस मुहिम में उनका साथ देने की अपील की है।
साल 2021 में भी की थी वार्ता की पेशकश
नक्सलियों ने इससे पहले 12 मार्च 2021 को भी शांति वार्ता की पेशकश की थी। तब नक्सलियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी कर तरफ से शांति प्रस्ताव सामने आया था। उस वक्त भी नक्सलियों ने ऑपरेशन रोकने और जेल में बंद नक्सलियों की रिहाई की मांग की थी। सरकार उस वक्त भी सशर्त वार्ता के लिए तैयार नहीं हुई थी।
गृहमंत्री बोले- कानून के दायरे में वार्ता स्वीकार
CG News: राज्य के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने शांति वार्ता की पेशकश पर कहा है कि सरकार किसी भी प्रकार की सार्थक वार्ता के लिए तैयार है, बशर्ते इसके लिए कोई शर्त ना हो। उन्होंने कहा कि यदि नक्सली वास्तव में मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं और बातचीत के लिए इच्छुक हैं तो उन्हें अपने प्रतिनिधि और वार्ता की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा। गृहमंत्री ने कहा कि वार्ता का स्वरूप आईएसआईएस जैसी किसी कट्टरपंथी विचारधारा की तर्ज पर नहीं हो सकता। यदि कोई चर्चा करना चाहता है तो उसे भारतीय संविधान की मान्यता स्वीकार करनी होगी। अगर संविधान को नकारते हैं और समानांतर व्यवस्था थोपने की कोशिश करते हैं तो वार्ता का कोई औचित्य नहीं रहता।
नक्सली दबाव में हैं, कथनी-करनी में फर्क
CG News: सुंदरराज पी, आईजी, बस्तर रेंज:
नक्सल संगठन बिखरता जा रहा है। नक्सली दबाव में हैं। उनकी कथनी और करनी में बहुत फर्क है। लगातार चल रहे ऑपरेशन के बीच इस तरह की बात कर वो बस्तर के लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करते रहे हैं। अगर शांति चाहते तो शर्त नहीं रखते।