इन 11 मिलों की टीम ने की जांच
जांच दल के द्वारा 11 मिलों की जांच की गई है। टीम ने साईं राइस दालमिल, श्रीराम फूड, भव्या फूड, सह सुनिधि इंडस्ट्रीज, ओम इंडस्ट्रीज, सावरिया फूड, यतिराज एग्रो, शिव इंडस्ट्रीज, बालाजी फूड, श्रीनिवासन इंडस्ट्रीज, सुमन सत्यनारायण मिल की जांच की है।
जांच में शामिल हैं ये बिंदु
जांच टीम द्वारा यह देखा जा रहा है कि मिलर्स द्वारा खरीदी केंद्रों व वेयर हाउसों से मिलिंग के लिए अबतक कितनी धान उठाई गई है। किन वाहनों से धान का उठाव किया गया है और किस स्थान पर ले जाया गया है। मिलिंग के बाद शेष मिलिंग के स्टॉक की क्या स्थिति है। सरकार के वेयर हाउसों में कितनी मात्रा में चावल जमा कर दिया गया है व चावल जमा किया जाना शेष है।
आरटीओ से कराई जा रही वाहनों की जांच
प्रशासन द्वारा मिलर्स द्वारा धान उठाव के लिए जिन ट्रकों के नंबर दिए गए हैं, वे कौन से वाहन हैं और किसके हैं, इसकी जांच के लिए सूची परिवहन विभाग को सौंपी है। परिवहन विभाग द्वारा यह देखा जा रहा है कि ये ट्रक ही हैं या फिर काई अन्य बाइक, कार व सवारी वाहनों के तो नंबर अंकित नहीं हैं, जिनसे धान का परिवहन होना बताया गया हो। यह वे वाहन हैं जो अंतरजिला वाले हैं।
मिल व वेयर हाउस की टटोली जा रही नब्ज
जांच दल में आधा दर्जन से अधिक अधिकारी व एक दर्जन से अधिक कर्मचारी शामिल हैं, जो जांच प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। टीम द्वारा मिल में चावल, धान का स्टॉक व इनकी गोदामों में स्टॉक को देखा जा रहा है। दस्तावेजों के अनुसार धान उठाव व सीएमआर चावल जमा करने की रिपोर्ट की भी गणना की जा रही है।
पहले से लगी सुगबुगाहट
जबलपुर, बालाघाट सहित अन्य जिलों में हुए धान घोटाले का मामला सामने आने के बाद कटनी में भी इसकी आंच आ पहुंची हैं। घोटाले की आशंका के चलते जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविकता का पता चल पाएगा। हालांकि इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि इस जांच के बारे में पहले ही सुगबुगाहर कुछ कारोबारियों को लग गई थी। जांच भी एक साथ नहीं हुई, जिससे मिलर्स को पर्याप्त समय मिल जा रहा है।

इन अधिकारियों का बना हैं जांच दल
मिलों की जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर प्रमोद चतुर्वेदी के साथ 5 सदस्यीय अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस जांच में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी सज्जन सिंह परिहार, सहायक आयुक्त सहकारिता राजयशवर्धन कुरील, जिला प्रबंधन नागरिक आपूर्ति निगम देवेंद्र तिवारी, जिला प्रबंधक वायएस सेंगर जिला प्रबंधक वेयर हाउस शामिल हैं। इसके अलावा जेएसओ पीयूष शुक्ला, यज्ञदत्त तिवारी, तहसीलदार अजीत तिवारी तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
32 जिलों का कराया जा रहा सत्यापन
बता दें कि कि मप्र शासन खाद्य विभाग द्वारा 32 जिलों में जांच कराई जा रही है। इसमें कटनी सहित मऊ, दमोह, डिंडौरी, शिवपुरी, मैहर, रायसेन, सागर, जबलपुर, पन्ना, रीवा, सीधी, बालाघाट, सिंगरौली, नरसिंहपुर, सतना, सिवनी, सीहोर, मंडला, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, झाबुआ, हरदा, अलीराजपुर, मुरैना, विदिशा, भिंड, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल शामिल हैं।
यह अनियमित्ता आईं हैं सामने
बता दें कि किसानों से समर्थन मूल्य में खरीदी गई धान गोदामों में पूरी जमा न होने, मिलर्स द्वारा उपार्जन केंद्र से सीधे उठाव के लिए सीएसएमएस पोर्टल पर धान परिवहन में छोटे-छोटे सामित लोडिंग क्षमता के वाहनों का उपयोग, लंबी दूरी के लिए वाहन द्वारा एक-दो दिन में कई फेरे लगाना, पोर्टल पर दर्ज वाहन अन्य राज्यों में कार्यरत पाया जाना, मिलिंग, सीएमआर जमा में अनियमितता सामने आने के बाद यह जांच कराई जा रही है।