राज ठाकरे के निर्देश के बाद मनसे पदाधिकारी और कार्यकर्ता मुंबई, ठाणे, पालघर, पुणे समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में मौजूद बैंकों में जाकर मराठी भाषा के उपयोग पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, इस दौरान कुछ जगहों पर बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ बदसलूकी और मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसे लेकर अब बैंक कर्मचारी यूनियन ने कड़ी नाराजगी जताई है और सीधे तौर पर राज ठाकरे को चेतावनी दी है।
बैंकों को राजनीतिक अखाड़ा न बनाएं- बैंक यूनियन
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉई एसोसिएशन (बैंक कर्मचारी संघ) के संयुक्त सचिव देवीदास तुलजापुरकर ने राज ठाकरे पर हमला बोलते हुए कहा, उन्हें यह करके सिर्फ राजनीतिक स्टंट करना था, लेकिन इसके लिए बैंकों को राजनीतिक अखाड़ा बनाना ठीक नहीं है। उन्होंने मनसे के आंदोलन पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि यदि बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ मारपीट की गयी तो वे भी सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे। बैंक कर्मचारियों की पिटाई बर्दाश्त नहीं…
उन्होंने आगे कहा कि कानून को हाथ में लेकर बैंकों पर दबाव बनाना कोई समाधान नहीं है। यदि वास्तव में मराठी भाषियों को बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ावा देना है, तो महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बैंकिंग भर्ती के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों की नीतियां तय करने वाले निदेशक मंडल में कोई मराठी व्यक्ति नहीं है, और वे इसके लिए जोर दें।
बैंक कर्मचारी संघ ने राज ठाकरे से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की, बजाय इसके कि बैंक कर्मचारियों को डराने-धमकाने का रास्ता अपनाया जाए। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मराठी भाषा के मुद्दे पर मनसे का आक्रामक रुख अब बैंकिंग क्षेत्र में विवाद का कारण बन रहा है। बहरहाल, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बैंक कर्मचारी यूनियन के इस सख्त रुख के बाद मनसे का यह आंदोलन क्या मोड़ लेगा।