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सरिस्का की 100 बीघा जमीन रसूखदारों को कर दी आवंटित… तहसीलदार, निरीक्षक व पटवारी सभी दोषी

Sariska Tiger Reserve: सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर एरिया की करीब 100 बीघा जमीन दर्जनभर से ज्यादा प्रभावशाली लोगों को आवंटित कर दी गई। सरपंच के रिश्तेदार व परिजन भी लाभार्थी बन गए।

अलवरApr 05, 2025 / 07:24 am

Anil Prajapat

Sariska-Tiger-Reserve
सुशील कुमार
अलवर। सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर एरिया की करीब 100 बीघा जमीन दर्जनभर से ज्यादा प्रभावशाली लोगों को आवंटित कर दी गई। सरपंच के रिश्तेदार व परिजन भी लाभार्थी बन गए। इसका खुलासा पूर्व एडीएम द्वितीय परसराम मीणा की जांच में हुआ। इस जांच में पूर्व एसडीएम अलवर को बचाया गया, तो मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया। अब लोकायुक्त ने प्रशासन से 30 मई को जवाब मांगा है। फिलहाल जांच में तहसीलदार, भू-अभिलेख निरीक्षक व पटवारी को दोषी पाया गया है। जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला ने इन तीनों को 16सीसीए के तहत चार्जशीट जारी करने के आदेश एसडीएम अलवर को दिए हैं।
10 मार्च 2022 को उमरैण पंचायत समिति के सभागार में 26 लोगों के बीच ढहलावास के एक दर्जन से अधिक लोगों को जमीन आवंटित की गई। राजेंद्र पुत्र दयाराम गुर्जर, रतीराम पुत्र दयाराम गुर्जर, विजय कुमार पुत्र दयाराम गुर्जर, हरदयाल पुत्र लल्लू गुर्जर, रामलाल पुत्र नानगराम, चेतराम पुत्र नानगराम, प्रभाती पुत्र नानगराम आदि को यह जमीन दी गई। जमीन की किस्म गैर मुमकिन पहाड़ थी।
इसी तरह अलवर तहसील के रोगड़ा निवासी हरज्ञानी पुत्र कर्ण सिंह, प्रकाश पुत्र कर्ण सिंह गुर्जर, लेखराम पुत्र सुरजाराम, रामशरण, सीराबास निवासी बाबूलाल पुत्र श्योराम, रामनगर के शीशराम पुत्र हरिराम आदि को भी जमीन आवंटित की गई थी। ढहलाबास के उदयभान शर्मा का आरोप है कि उस दौरान एसडीएम प्यारेलाल सोठवाल, तहसीलदार कमल पचौरी, पटवारी ढहलावास जितेंद्र कुमार छावल आवंटन प्रक्रिया में शामिल थे। मामले की शिकायत के बाद जांच पूर्व एडीएम द्वितीय परसराम मीणा ने की थी।

ये है जांच रिपोर्ट: लगातार कब्जा नहीं था फिर भी आवंटन

-राजस्व नियमों के क्रम में पत्रावली पर तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी की स्पष्ट रिपोर्ट नहीं है। तीनों पत्रावलियों में आवेदक की ओर से एक शपथ पत्र 50 रुपए के स्टाम्प पेपर पर दिया गया है, जिसमें वर्ष 2004-05, 2005-06, 2006-06, 2006-07, 2014-15, 2016-17, 2019-20 प्रकरणों में रिकॉर्ड के अनुसार कब्जा नहीं पाया गया था। यानी लगातार कब्जा नहीं था, फिर भी राजकीय भूमि का नियमन कर दिया गया, जो राजस्व नियमों के विपरीत है। तहसीलदार को राजकीय भूमि को नियमन या आवंटन कराने से पूर्व नियमन करने के नियमों का भली भांति परीक्षण करना चाहिए था।
-राजस्व ग्राम ढहलावास तहसील अलवर का सभी राजस्व क्षेत्र राज्य सरकार की अधिसूचना संख्या – एफ 3(34) वन/2007 तिथि 6 जून 2012 से बाघ परियोजना सरिस्का के बफर क्षेत्र के रूप में घोषित किया जा चुका है। बफर क्षेत्र घोषित होने पर राजस्थान भू-राजस्व (कृषि हेतु भूमि आवंटन) नियम, 1970 के भाग 4 के अनुसार इन नियमों के अधीन आवंटन या नियमन नहीं किया जा सकता है।
-नियमन की सिफारिश रिपोर्ट पर तहसीलदार, गिरदावर व पटवारी ने सरिस्का बफर जोन होने संबंधी किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं की गई है, जो गंभीर है। रिपोर्ट में जानबूझकर इन तथ्यों को छिपाया गया है।
-इसी तरह ग्राम रोगडा, सीरावास व रामनगर में नियमन किए गए। क्रम संख्या एक से सात तक पर अंकित पांचों पत्रावलियों के रिकॉर्ड अनुसार आवेदकों ने आवेदन नियमन करने के लिए लगाया था। जांच रिपोर्ट में पटवारी, गिरदावर एवं तहसीलदार ने नियमन की श्रेणी का न मानकर, आवंटन करने की सिफारिश की गई।
-क्रम संख्या 5 व 6 की पत्रावली पर तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी की स्पष्ट रिपोर्ट नहीं है। राजकीय भूमि का नियमन कर दिया गया, जो राजस्व नियमों के विपरीत है।

-तहसीलदार को परीक्षण करना चाहिए था। पटवारी व भू अभिलेख निरीक्षक ने पूरा खेल किया।
-राजस्व ग्राम रोगडा, सीराबास व रामनगर तहसील अलवर का सभी राजस्व क्षेत्र राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार सरिस्का का बफर एरिया है, फिर भी आवंटन कर दिया गया।

-क्रम संख्या एक से तीन पर अंकित तीनों पत्रावलियां, आवंटन / नियमन कमेटी में जो सरपंच हैं, उनके ही निकटतम परिवार की हैं।
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कार्रवाई विचाराधीन

भूमि आवंटन में अनियमितता के लिए तहसीलदार कमल पचौरी, गिरदावर हल्का अरविंद दीक्षित व पटवारी जितेंद्र छावल के विरुद्ध सीसीए नियम 16 के तहत कार्रवाई विचाराधीन है।
-आर्तिका शुक्ला, जिला कलक्टर

जमीन आवंटित करने के लिए कमेटी बनाई गई थी। उसी कमेटी ने यह आवंटन नियमानुसार किए थे। पूर्व में भी जांच हुई थी, जिसमें कुछ नहीं आया। आरोप निराधार हैं।
-कमलेश गुर्जर, सरपंच

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