हादसा जामनगर शहर से 12 किलोमीटर दूर सुरवदा गांव के पास एक खुले मैदान में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के अनुसार, विमान के जमीन से टकराते ही आग की लपटें उठीं। दुर्घटनास्थल पर विमान का कॉकपिट और पूंछ अलग-अलग जगहों पर बिखरे हुए दिखाई दिए, जो आग में जल रहे थे। पुलिस अधीक्षक प्रेमसुख डेलू ने बताया, “एक पायलट ने क्रैश से पहले सुरक्षित रूप से इजेक्ट कर लिया, लेकिन दूसरा पायलट अभी लापता है। विमान के जलने के बाद पुलिस और दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे और लापता पायलट की तलाश शुरू की।”
भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि यह ट्विन-सीटर जगुआर एक रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी पर था। जगुआर एक ट्विन-इंजन फाइटर बॉम्बर है, जो सिंगल और ट्विन-सीट दोनों वेरिएंट में उपलब्ध है। यह विमान वायुसेना में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है और 1970 के दशक के अंत में पहली बार शामिल किया गया था। समय के साथ इसमें कई बड़े अपग्रेड किए गए हैं, फिर भी हाल के वर्षों में इसके हादसों ने सवाल खड़े किए हैं।
इससे पहले 7 मार्च 2025 को भी एक जगुआर विमान अंबाला में सिस्टम खराबी के कारण क्रैश हो गया था। उस घटना में पायलट ने विमान को आबादी वाले इलाके से दूर ले जाकर सुरक्षित रूप से इजेक्ट किया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया था। लेकिन जामनगर की इस ताजा घटना ने वायुसेना के लिए नई चुनौतियां पेश की हैं।
सुरवदा गांव के इस हादसे ने स्थानीय लोगों को भी सकते में डाल दिया। आग बुझाने और बचाव कार्य में जुटे दमकलकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन एक पायलट की मौत की खबर ने माहौल को गमगीन कर दिया। वायुसेना ने मृत पायलट के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल पायलट के इलाज की जानकारी दी। इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी शुरू की गई है, जो तकनीकी खराबी और अन्य पहलुओं की जांच करेगी।
यह हादसा न केवल वायुसेना के लिए एक झटका है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी दुखद है जो अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होगा कि आखिर क्या कारण था जो इस उड़ान को तबाही में बदल गया।