विशिष्ट लोक अभियोजक भवानी सिंह जेरठी ने बताया कि 10 अप्रैल 2018 को सीकर जिले में रहने वाले पीड़ित पिता ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया कि वह जिले में अपने परिवार के साथ रहता था। उनकी दोनों नाबालिग बेटियां सरकारी स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं। 8 अप्रैल को सुबह 11 बजे दोनों बेटियां निकली थीं लेकिन वापस नहीं लौटी। एक बेटी की उम्र 15 और दूसरी की 14 साल की थीं, जिनके पास एक मोबाइल भी था। पुलिस ने दोनों लड़कियों को करीब 15 दिन बाद आरोपियों के घर से दस्तयाब किया। मामले में विधि संघर्षरत दो किशोरों और चार आरोपियों गौरव वैष्णव उर्फ गोविंदा, विनोद, सायरा बानो उर्फ कपूरी और गनी मोहम्मद को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया कि विधि संघर्षरत दो किशोरों और आरोपी विनोद ने दोनों लड़कियों के साथ सामुहिक बलात्कार किया था। जबकि आरोपी गौरव लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने के षड्यंत्र में शामिल था। वहीं आरोपी सायरा बानो और गनी मोहम्मद के घर पर दोनों नाबालिग लड़कियों के साथ गैंगरेप किया गया था।
अपहरण में सहयोग के आरोपी को सात साल के कठोर कारावास की सजा-
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 26 गवाह और 36 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए थे। मामले में सीकर के पोक्सो न्यायालय संख्या -2 की विशिष्ट न्यायाधीश आशा कुमारी ने मामले में विधि संघर्षरत दो किशोरों (जो अब बालिग हो चुके हैं) और सायरा बानो, मोहम्मद गनी, विनोद को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं अपहरण में सहयोग करने के आरोपी गौरव वैष्णव को 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। मामले में राज्य सरकार की तरफ से विशिष्ट लोक अभियोजक भवानी सिंह जेरठी ने पैरवी की। वहीं पीड़ित पक्ष की तरफ से एडवोकेट मोहनलाल चिरानियां ने पैरवी की।
गंभीर प्रकृति के अपराध में अपराधियों को दंडित करना उचित-
विशिष्ट न्यायाधीश आशा कुमारी ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की है कि ऐसे गंभीर प्रकृति के अपराधों में उचित दंड नहीं दिया गया तो ऐसे अपराधों में बढ़ोतरी व पुनरावृत्ति होगी और इस प्रकार के अपराध कारित करने वाले अपराधियों व इस प्रकार के अपराध कारित करने में सहयोग करने वाले अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे। समाज में गलत संदेश जाएगा, ऐसी स्थिति में अभियुक्तों को दंडित किया जाना उचित प्रतीत होता है।