कैसे लगे शिक्षक, करोड़ों का घोटाला!
सीकर में वोकेशनल कोर्स वाले 89 स्कूलों में 1.13 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया। स्कूलों को इसमें 50 हजार से छह लाख रुपए तक की राशि मिली। इसमें अन्य खर्च सहित स्कूलों के गेस्ट टीचर का वेतन भी शामिल था। चूंकि शिक्षक के बजट की उम्मीद होने की वजह से ज्यादातर स्कूलों ने इनकी नियुक्ति नहीं की। ऐसे में इस बजट के उपयोग को लेकर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। प्रदेशभर में जांच हो तो करोड़ों का घोटाला उजागर हो सकता है।सीएसजी पर भी सवालस्कूलों को छोटे— मोटे खर्चों के लिए जारी होने वाली 10 महीने की कंपोजिट ग्रांट भी 28 मार्च को जारी की गई। सीकर जिले में ही ये करीब पौने सात करोड़ रुपए की थी। इसे भी स्कूलों को 31 मार्च तक ही खर्च करना था। ऐसे में दो दिन के स्कूली अवकाश में कितने सच्चे- झूठे बिलों के साथ ये राशि खर्च हुई होगी इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि पूरे सत्र में हुए खर्च के बिलों को इसमें समायोजित करने पर इसमें बजट दुरुपयोग की संभावना थोड़ी कम रही है।समय पर मिलता तो होता सदुपयोगस्कूलों को ग्रांट सत्र की शुरुआत में मिलती तो इस राशि का सदुपयोग हो सकता था, लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत में जारी करने पर राशि का सही उपयोग नहीं हो सका। भ्रष्टाचार करने की छूट भी मिल गई।
इनका कहना है:—
जिले में स्कूलों केा मिली ग्रांट लगभग खर्च हो चुकी है। बजट के दुरुपयोग की कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई शिकायत आएगी तो जांच की जाएगी। राकेश लाटा, एडीपीसी, समसा। जो ग्रांट सत्र की शुरुआत में मिलनी चाहिए वह वित्तीय वर्ष के अंत में मिलने से उसका सदुपयोग नहीं हो सका। पूरी आशंका है कि स्कूलों ने काल्पनिक खर्च भी दिखाया हो, लेकिन ये पूरी गलती सरकार की ही है, जिसने स्कूलों को एनवक्त पर बजट देकर खर्च करने के लिए मजबूर भी किया।
विनोद पूनिया, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)।