मंदिर से जुड़े कल्याण सिंह झाला ने बताया कि पूर्व राजराणा की पत्नी राठौड़ बहुजी ने बावड़ी का निर्माण करवाया था। मंदिर में स्वच्छ जल और पुजारी के स्नान के लिए समीप ही बावड़ी का निर्माण करवाया। यह बावड़ी लगभग 300 साल पुरानी है। कस्बे में सभी पौराणिक मंदिर के समीप बावड़ी है, पूर्व में रानियों की ओर से अपने निजी खर्चे से बावड़ी का निर्माण करवाया जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में जब अकाल पड़ा था, तब कई परिवार वाले यहां से पानी ले जाते थे।
इन्होंने निभाई भागीदारी
श्रमदान के दौरान मुरलीधर मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष राजसिंह झाला, विजय सिंह झाला, कल्याण सिंह झाला, पुष्पेन्द्रसिंह झाला, कैलाश लोढ़ा, गोपाल लोढ़ा, सुनील लोढ़ा, रविराज सिंह, प्रताप सिंह झाला, हरिसिंह झाला, करण सिंह, गोपाल सिंह झाला, राज्यवर्धन सिंह झाला, लोकेंद्र सिंह झाला, निर्भय सिंह राठौड़, भैरूसिंह राठौड़, पंकज वैष्णव, गोपाल दास वैरागी, आशीष झा, दिनेश वैष्णव, शशिपुरी गोस्वामी, कन्हैयालाल गमेती, रामसिंह राठौड़, कमलेश, लेहरू लाल, विजय सिंह झाला, जीवन सिंह चौहान, सूर्य प्रताप सिंह चौहान आदि मौजूद थे।