यूरोपीय देशों के संसोधन के साथ हुआ पास
रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासभा में जो प्रस्ताव (UN Resolution on Russia Ukraine war) पेश हुआ था उसे यूक्रेन ने तैयार किया था। इस प्रस्ताव को यूक्रेन के साथ उसके यूरोपीय सहयोगी देशों के दिए गए संशोधनों के साथ मंजूर कर लिया गया है। इस प्रस्ताव का नाम था ‘यूक्रेन में व्यापक न्यायसंगत और स्थायी शांति को आगे बढ़ाना’।
अमेरिका और भारत-चीन ने किसे किया वोट
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश हुए इस प्रस्ताव पर भारत और चीन (India China Voting on Russia Ukraine War Resolution) दोनों ने इस पर वोटिंग से खुद को बाहर रखा। चीन, जो रूस का सबसे ज्यादा करीबी देश माना जाता है, उसने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया। वहीं भारत के रिश्ते भी रूस के (India Russia Relations) साथ बेहद मजबूत माने जाते हैं। लेकिन भारत भी वोटिंग में शामिल नहीं हुआ। वहीं अमेरिका ने रूस के पक्ष में मतदान किया।
किसने यूक्रेन के पक्ष में किया मतदान
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश हुए रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने के लिए बनाए गए इस प्रस्ताव पर कुल 93 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। सबसे खास बात ये है कि अमेरिका को छोड़कर G-7 देशों ने भी यूक्रेन के पक्ष में ही वोट किया। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों ने यूक्रेन के पक्ष में वोट किया। इस प्रस्ताव के विपक्ष में वोट करने वाले देशों में अमेरिका समेत 18 देश शामिल रहे। वहीं ब्राजील समेत भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान, श्रींलका समेत 65 मुल्कों ने इस वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया।
प्रस्ताव के बाद अब क्या होगा?
यूक्रेन के क्षेत्रों से कब्जा छोड़ने के लिए इस प्रस्ताव पर बहुमत मिला। इस प्रस्ताव के पास होमे के बाद रूस के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेन्ज़्या ने कहा कि इस प्रस्ताव को रूस इस जंग को संकट को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए एक एक पहली सीढी़ के तौर पर देखता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जो प्रस्ताव पेश हुआ है वो आदर्श प्रस्ताव नहीं है इसमें कई संसोधनों की जरूरत है। रूस ने कहा कि जब तक यूरोपीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख देशों के बीच रचनात्मक सहयोग बहाल नहीं हो जाता, तब तक ये प्रस्ताव वे सफल नहीं होगा। रूस ने सभी देशों से आग्रह करते हुए कहा कि जो वास्तव में यूक्रेन में स्थायी शांति लाना चाहते हैं, वो यूक्रेन के नेता और उसके कठपुतली संचालकों को अमेरिका की कोशिशों को पटरी से न उतरने दें।
जानकारों का कहना है कि रूस के दिए गए बयान से साफ है कि वो इस प्रस्ताव के पास होने के बावजूद अभी यूक्रेन से अपना कब्जा नहीं हटाएगा। लेकिन अगले सप्ताह रूस और अमेरिका के राजनयिकों के बीच होने वाली बैठक में इस पर कुछ फैसला लिया जा सकता है।