शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था, अब राजस्थान के स्कूलों में प्रोमोशन के बाद लेक्चरर नहीं बनेंगे उप प्राचार्य
Rajasthan Education Department New System : राजस्थान में शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था। अब स्कूलों में व्याख्याता प्रोमोशन के बाद उप प्राचार्य नहीं बनेंगे। सेवा नियमों में संशोधन की तैयारी तेज गति से की जा रही है।
Rajasthan Education Department New System : शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था। अब स्कूलों में व्याख्याता प्रोमोशन के बाद उप प्राचार्य नहीं बनेंगे। सेवा नियमों में संशोधन की तैयारी तेज गति से की जा रही है। जीहां, आने वाले वक्त में स्कूलों में उप प्राचार्य पद खत्म हो जाएंगे। वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। अब राजस्थान शिक्षा सेवा नियमों में संशोधन के लिए उप शासन सचिव शिक्षा ग्रुप 1 ने निदेशालय से प्रस्ताव भी मांग लिया है। शिक्षा विभाग में व्याख्याताओं पदोन्नति का लाभ देने के लिए अब वरिष्ठ व्याख्याताओं के नए पदों का सृजन किया जाएगा।
व्याख्याताओं की डीपीसी में मिलेगा अगला पद वरिष्ठ व्याख्याता
पिछली कांग्रेस सरकार के समय शिक्षा विभाग ने वर्ष 2022 में व्याख्याताओं को पदोन्नत करने के लिए उप प्राचार्या के पद सृजित किए गए थे। इसे भाजपा सरकार बनने के बाद डाइंग केडर घोषित (आने वाले समय में समाप्त हो जाएगा) कर दिया था। ऐसे में 1 अप्रेल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष में वर्ष 2025-26 की व्याख्याताओं की डीपीसी में उन्हें अगला पद वरिष्ठ व्याख्याता का मिल सकेगा। शिक्षा ग्रुप 1 के उप शासन सचिव ओपी वर्मा ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को राजस्थान शिक्षा राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।
पदोन्नति से ही भरेंगे वरिष्ठ व्याख्याता के पद
नियमों संशोधन के बाद शिक्षा विभाग में कार्यरत व्याख्याताओं की अगली पदोन्नति वरिष्ठ व्याख्याता के पदों पर होगी। इनका वेतन निर्धारण एल 14 में होगा। ये सभी पद शत प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाएंगे। यानी इन पदों पर सीधी भर्ती नहीं होगी। वरिष्ठ व्याख्याता के पदों पर तीन वर्ष व्याख्याता के पद पर कार्यरत कार्मिक पदोन्नति के पात्र होंगे। इसके बाद वरिष्ठ व्याख्याता की पदोन्नति प्राचार्य के रूप में होगी।
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेश प्रवक्ता राजीव चौधरी का कहना है कि उप प्राचार्य पद को डाइंग कैडर घोषित कर वरिष्ठ व्याख्याता का पद सृजन किया जा रहा हैं। इसका संगठन विरोध करता है। पहले माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक का पद था, जिस पर 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती एवं 50 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति होती थी और सीधी भर्ती में 5 वर्ष का शिक्षक अनुभव मांगा जाता था लेकिन अभी वरिष्ठ व्याख्याता का पद स्वीकृत किया जा रहा है, जिसमें सभी पद 100 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाएंगे। संघ मांग करता है कि यदि वरिष्ठ व्याख्याता के पद सृजित किए जाते है, तो प्राचार्य के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती और 50 प्रतिशत पदों को पदोन्नति से भरा जाना चाहिए। इससे कार्यरत लाखों तृतीय श्रेणी शिक्षकों और वरिष्ठ अध्यापकों को उच्च पदों पर जाने का अवसर मिल सके।
पहले अप्रेल 2022 में माध्यमिक विद्यालयों में हैडमास्टर के पद समाप्त कर उप प्राचार्य का पद सृजित कर शत-प्रतिशत पदोन्नति से लेने का प्रावधान किया। इससे सीधी भर्ती से आने वाले 50 फीसदी युवा शिक्षकों का रास्ता रोका गया। अब उप प्राचार्य के 24 हजार पद को डाइंग कैडर घोषित कर वरिष्ठ व्याख्याता का पद सृजित किया है। परन्तु स्कूलों में मौजूदा तीन व्याख्याताओं के पदों में से ही एक की कटौती कर एक वरिष्ठ व्याख्याता दिया जाएगा। इस तरह व्याख्याताओं के भी 12 हजार 421 पद कम हो जाएंगे। इससे किसी भी वर्ग को फायदा नहीं है।
रिक्त होने पर प्राचार्य का चार्ज वरिष्ठ व्याख्याता को
उप प्राचार्य पद समाप्त होने से भविष्य में प्राचार्य का पद रिक्त वाले स्कूल में वरिष्ठ व्याख्याता को प्राचार्य का अतिरिक्त कार्यभार दिया जाएगा। उसे विषय के शिक्षण के साथ स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी देखना होगा।