टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन में प्रे बेस की कमी चुनौती बना हुआ है। जिले में रामगढ विषधारी टाइगर रिजर्व बनने के साथ ही बाघ-बघेरे भी बढऩे लगे है, लेकिन जंगल में प्रे-बेस की कमी जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए खतरा बनने लगी है। गौरतलब है कि गत सप्ताह ही एक पैंथर ने शाहपुरा गांव में एक बछड़े को मार दिया था, तब ग्रामीणों ने उसे हल्ला कर भगाया।
पूर्व में भी कालदां की पहाड़ी तलहटी में बसे उमरथुना, कांटी, खेरुणा, नीमतलाई, बिशनपुरा, अस्तोली, आदि गांवों में आकर बाड़े में बंधे मवेशियों का शिकार किया था। ग्रामीणों ने वन विभाग से कई बार वन्यजीव के आबादी क्षेत्र में आने व मवेशियों को मारने की शिकायत की लेकिन समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार टाइगर रिजर्व के कोर
क्षेत्र में तो बाहर से चीतल सांभर लाकर छोड़े जा रहे हैं, लेकिन कलदां जैसे जैवविविधता से भरपूर जंगल में बाघ बघेरों के लिए प्रे बेस बढ़ाने पर वन विभाग का ध्यान नहीं है। देवझर महादेव से भीमलत महादेव तक फैला करीब 350 वर्ग किलोमीटर का इलाका वन्यजीवों के लिहाज से काफी समृद्ध एवं निर्जन वन क्षेत्र है। यहां दो दर्जन से अधिक बघेरे मौजूद है जो भोजन की तलाश में भटकने को मजबूर हैं।