दरअसल, बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में भारतीय सीनियर टीम के अलावा इंडिया-ए, इंडिया अंडर-19, इंडिया अंडर-23, इंडिया अंडर-16, इंडिया अंडर-15, राज्यों की टीमों और अन्य टीमों के स्पिन गेंदबाजों की क्षमताओं को निखारने पर काम किया जाता है। स्पिन बॉलिंग कोच को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख के साथ मिलकर कोचिंग कार्यक्रम और प्रदर्शन निगरानी योजनाएँ तैयार करनी होंगी। इसके अलावा चयनकर्ताओं, राष्ट्रीय व राज्य के कोच, परफॉर्मेंस एनालिस्ट, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग एक्सपर्ट के साथ हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग प्लान्स बनाने होंगे।
स्पिन बॉलिंग कोच की मुख्य जिम्मेदारियों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में क्रिकेट टीमों के लिए प्रशिक्षण सत्रों की योजना बनाना और उन्हें लागू करना शामिल होगा। जरूरत पड़ने पर खिलाड़ियों को तकनीकी कोचिंग प्रदान करना, निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन का विकास और मूल्यांकन करना। इसके अलावा, अन्य विशेषज्ञ कोच, चयनकर्ताओं और सहयोगी स्टाफ के साथ मिलकर प्रतिभाशाली स्पिन गेंदबाजों की खोज करना और उनकी क्षमताओं को विकसित करना भी उनके कार्यों में शामिल होगा।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में क्या होगी जिम्मेदारी? - खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग सेशन का इंतजाम।
- खिलाड़ियों को जरूरत के मुताबिक एक-एक कर तकनीकि कोचिंग पर जोर।
- सभी खिलाड़ियों के निजी प्रदर्शन पर नजर।
- अन्य स्पेशलिस्ट कोच, सिलेक्टर्स और सपोर्ट स्टाफ के साथ मिलकर काम करना. ताकि, खिलाड़ियों के टैलैंट को निखारा जा सके।
- आज के मौजूदा आधुनिक तकनीकों का बेहतर इस्तेमाल।
- खिलाड़ियों की इंजरी संबंधित प्रोटोकॉल पर काम।
कौन कर सकता है अप्लाई –
इसके लिए जरूरी है कि आवेदक पूर्व भारतीय खिलाड़ी या फिर फर्स्ट क्लास लेवल पर कम से कम 75 मैच खेल चुका हो. इसके लिए पिछले 7 सालों में कम से कम 3 साल कोचिंग का अनुभव हो। आवेदव ने भारतीय टीम के अलावा किसी अन्य इंटरनेशनल टीम, इंडिया अंडर-19, इंडियन वीमेंस टीम, आईपीएल टीम या किसी स्टेट टीम के साथ काम किया हो। आवेदक अपना एप्लीकेशन 10 अप्रैल 2025 के शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं. इसके लिए बीसीसीआई ने अपना लिंक जारी किया है. साथ ही आवेदक को सब्जेक्ट लाइन में ‘स्पिन बॉलिंग कोच’ मेंस करना होगा।