करीब 4000 की आबादी वाली इस पंचायत में कुल चार प्राइमरी स्कूल हैं। दो में बच्चों की संख्या ठीक-ठाक है। लेकिन दो स्कूलों में अजब-गजब नजारा है। एक स्कूल में मात्र 4 बच्चे हैं, जो आए दिन आते नहीं है। इनके लिए दो रेगुलर शिक्षक हैं। वहीं दूसरे स्कूल में बच्चे ही नहीं हैं लेकिन इनके लिए दो शिक्षक हैं। हालात यह है कि दोनों स्कूलों में ताला लगा रहता है।
केस-1: शासकीय प्राथमिक शाला सबरिया डेरा
पामगढ़ ब्लॉक के मुलमुला में शासकीय प्राथमिक शाला सबरिया डेरा, जहां हाल ही में नई स्कूल बिल्डिंग बनी है। यहां दो शिक्षकों की पदस्थापना है। जिसमें गायत्री सिंह
हेडमास्टर तो प्रमिला भारद्वाज सहायक शिक्षिका हैं। मंगलवार की सुबह जब पत्रिका टीम पहुंची तो स्कूल में ताला लटका था। ग्रामीण बसंत कुमार साहू ने बताया कि यहां बच्चे ही नहीं है।
केस-2: प्राथमिक शाला गुड़ीपारा
दूसरा स्कूल भी मुलमुला के ही गुड़ीपारा मुलमुला में देखने को मिला। यहां भी ताला लगा मिला। ग्रामीणों से पूछने पर बताया कि यहां तो छात्र ही नहीं है। यहां के प्रधान पाठक भागवत प्रसाद डार्के हैं तो वहीं सहायक शिक्षक श्वेता दुबे की पोस्टिंग है। लेकिन यहां छात्र आते नहीं और स्कूल का ताला खुलता भी नहीं। मध्याह्न भोजन कागजों में
बताया जा रहा है कि गुड़ीपारा प्राथमिक शाला में चार छात्रों का नाम रजिस्टर में दर्ज है। इनके लिए बाकायदा मध्यान्ह भोजन भी कागजों में बनता है। इसकी शिकायत
भाजपा के जिला प्रतिनिधि भाजपा मंडल अध्यक्ष बसंत कुमार साहू ने कलेक्टर से की है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डीईओ के अश्वनी कुमार भारद्वाज ने कहा की जिन स्कूलों में छात्र नहीं हैं उन स्कूलों के
शिक्षकों को कहीं अन्यत्र अटैच किया गया है। कोई भी शिक्षक बैठे ठाले वेतन नहीं ले रहा है। मुलमुला के शिक्षकों को भी अन्यत्र अटैच किया गया है।