सुप्रीम कोर्ट ने दी थी 31 मार्च तक जमानत
आसाराम बापू को 2013 के बलात्कार मामले में 2023 में सत्र अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया था और वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। उन्होंने छह महीने की अस्थायी जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उनके वकील ने तर्क दिया कि डॉक्टरों की राय के अनुसार उन्हें 90 दिनों के पंचकर्म चिकित्सा सत्र की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जनवरी में उन्हें 31 मार्च तक चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत दी थी। शुक्रवार (28 मार्च) को न्यायमूर्ति इलेश जे. वोरा और न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की खंडपीठ ने विभाजित फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति वोरा ने तीन महीने की अस्थायी जमानत दी, जबकि न्यायमूर्ति भट्ट ने इसे खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति भट्ट का अवलोकन
न्यायमूर्ति भट्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को 31 मार्च तक अंतरिम जमानत दी थी। इस दौरान 28 जनवरी से 19 फरवरी तक आसाराम ने कई एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन प्रत्येक डॉक्टर को केवल एक बार दिखाया और सलाह के बावजूद किसी का भी फॉलो-अप नहीं लिया।
बिना किसी उचित कारण के जमानत की अवधि बढ़ाने की कोशिश
उन्होंने कहा, अदालत के रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने एलोपैथिक उपचार नहीं लिया, हालांकि उन्होंने डॉक्टरों से राय जरूर ली। ऐसा लगता है कि वह बिना किसी उचित कारण के अस्थायी रूप से दी गई जमानत की अवधि को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए याचिका की खारिज
पंचकर्म चिकित्सा से जुड़े दस्तावेजों पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति भट्ट ने कहा, यह चौंकाने वाला है कि याचिकाकर्ता ने पंचकर्म चिकित्सा का दावा किया, लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 1 मार्च को ही अस्पताल से संपर्क किया। जबकि वह 7 जनवरी से ही अंतरिम जमानत पर थे। न्यायमूर्ति भट्ट ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि कोई ‘वास्तविक चिकित्सा आवश्यकता’ स्थापित नहीं की गई है, इसलिए वह इस याचिका को खारिज कर रहे हैं।