14 मार्च से ही पुष्पेंद्र लगातार थाने के चक्कर काट रहा था। मृतक लोकेंद्र ने अपने बड़े भाई पुष्पेंद्र को मैसेज किया। इसमें उसने बताया कि वह सुसाइड कर रहा है और सुभाष नगर स्थित मकान के फ्रीज में कुछ रखा है। उसे वह निकाल ले। पुष्पेंद्र सुभाष नगर स्थित मकान पर गया और फ्रिज में से सुसाइड नोट निकाला। इसके बाद वह कोतवाली पुलिस के पास गया। उसने अपने भाई की गुमशुदगी की शिकायत पुलिस को दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मंगलवार को फिर से पुष्पेंद्र पुलिस के पास पहुंचा और मकान की तलाशी लेने को कहा।
इसके बाद पुलिस सुभाष नगर स्थित मकान पर गई। मकान को खोलते ही उसमें से बदबू आने लगी। अंदर जाकर देखा तो लोकेंद्र का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ था। मृतक लोकेन्द्र के बड़े भाई पुष्पेंद्र ने बताया कि मेरा भाई घर बनाने का काम करता था। वह दिसंबर 2024 में भरतपुर आया और विजय नगर स्थित अपनी ससुराल के पास मकान किराए पर रहकर रहने लगा। वहां पर उसकी पहचान अजीत से हुई।
अजीत ने लोकेंद्र से कहा कि मेरा एक मकान सुभाष नगर में है। जो खंडहर की तरह पड़ा है। इसलिए उसकी वह मरम्मत कर दे। इसके बाद लोकेंद्र ने अजीत के घर की मरम्मत की लोकेंद्र ने फरवरी में काम पूरा कर लिया। जिसके बाद लोकेंद्र ने अजीत से 35 हजार रुपये मजदूरी के मांगे। अजीत ने उसे 20 हजार 3 सौ 50 रुपये दे दिए। बाकी के पैसे नहीं दिए। लोकेंद्र ने जब उससे पैसे मांगे तो अजीत और उसके भतीजे आकाश ने लोकेन्द्र के साथ मारपीट की।
सुसाइड नोट में ये लिखा…
सुसाइड नोट में हैै… मम्मी,पापा भाई और संगीता सभी के लिए सॉरी, अजीत पुत्र नेमीसिंह, आकाश पुत्र बलवीर सिंह कुम्हेर इन दोनों की वजह से मैं जान देने जा रहा हूं। हाल में अजीत और आकाश राजेंद्र नगर में रहते हैं। उनका वहां पर एक प्लाट भी है। मैं सबसे पहले राजेंद्र नगर स्थित एक मकान में रहता था। वह मकान आकाश की मम्मी के नाम है। मैंने इनके सुभाष नगर स्थित मकान में भी काम किया था। मुझे आकाश ने काम के 14 हजार 650 रुपए नहीं दिए। अजीत सिंह आकाश का चाचा है। उसने मोटर और चक्की खराब की। जिसे मैंने बनवाने के लिए डाल दिया। वह 15 साल पुरानी मोटर चक्की थी। वह ठीक नहीं हुई। उनके कहने पर मैंने मोटर चक्की को बेच दिया। जो 7 हजार रुपये की बिकी। 19, 20 फरवरी 2025 को मैं उनके राजेंद्र नगर स्थित मकान पर गया। मैंने उन्हें 7 हजार रुपये दे दिए। जब मैंने आकाश और अजीत से अपने काम के पैसे मांगे तो, दोनों ने मुझे कमरे में बंद कर बहुत मारा।
आकाश सिंह बोल रहा था मैं पुलिस में हूं। तूने किसी को बताया तो, तुझे मोटर चक्की चोरी के आरोप मैं तुझे थाने में बंद करवा दूंगा। 25 फरवरी को मैंने अजीत सिंह को फोन किया। इसके बाद वह विजय नगर स्थित मेरी ससुराल में गए। जहां से वह मुझे सुभाष नगर स्थित मकान पर लेकर गए और मेरे सामान का लॉक लगा दिया। जिसके बाद मुझे वहां से भगा दिया। मुझसे अजीत सिंह बोला की सामान नहीं मिलेगा। अजीत सिंह मेरे से 70 हजार रुपए मांग रहा है।
11 फरवरी को सामान लेने के लिए मेरी सासु मां और तारा भाई गए थे। उन्होंने सामान देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा लोकेन्द्र को भेजो उसे ही सामान मिलेगा। अजीत ने मुझे फोन किया और मुझे गालियां दी। अजीत ने आरोप लगाया कि तू मेरे सुभाष नगर वाले मकान जेवर ले गया है। मेरे भाई का लडक़ा आकाश में है। आज तुझे उल्टा फंसा देंगे। लोकेन्द्र ने अपनी पत्नी के लिए लिखा कि संगीता बच्चों का ख्याल रखना और दूसरी शादी मत करना। मेरे घर वाले तुम्हें पूरा सहारा देंगे। अजीत ने अपना मकान रिपेयर करने के लिए कहा था।