लोगों का मिला जबरदस्त समर्थन
अभियान की शुरुआत संकटमोचन तालाब से जलकुंभी निकालने के साथ हुई। शहरवासियों ने इस मुहिम में बढ़-चढकऱ हिस्सा लिया और तालाब को साफ करने का काम शुरू किया। महिलाएं और पुरुषों की टीमों ने तालाब में पहुंचकर श्रमदान किया और जलकुंभी निकालने का काम शुरू कर दिया। देखते ही देखते, 5 ट्रॉली जलकुंभी तालाब से बाहर निकाली गई। इस अभियान में स्थानीय युवाओं, समाजसेवियों और प्रशासन के अधिकारियों का भी पूरा सहयोग मिला।ये है आगे की योजना
अभियान के पहले चरण में जलकुंभी निकालने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद तालाब की सफाई, निस्तार व्यवस्था और जलस्तर बढ़ाने के उपायों पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन और समाजसेवियों के सहयोग से तालाब के जीर्णोद्धार के लिए एक ठोस योजना बनाई जाएगी ताकि भविष्य में इस तालाब की स्थिति को बनाए रखा जा सके। इस अभियान के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि अगर हम मिलकर प्रयास करें, तो हमारे जलस्रोतों को बचाया जा सकता है। यह केवल एक तालाब को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह हमारे जलसंसाधनों के संरक्षण का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।पत्रिका व्यू
संकटमोचन तालाब का जीर्णोद्धार अभियान छतरपुर शहर के जल संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह दिखाता है कि प्रशासन, समाजसेवी और स्थानीय लोग अगर एकजुट होकर काम करें तो बड़े से बड़े पर्यावरणीय संकट से निपटा जा सकता है। तालाबों को बचाने और जलस्तर को बनाए रखने के लिए हमें इस तरह के और अभियानों को गति देने की आवश्यकता है। जल है तो जीवन है और इस जीवन को बचाने के लिए हमें अपने जलस्रोतों की पूरी देखभाल करनी होगी।इनका कहना है
तालाब सफाई का अभियान 30 जून तक चलाया जाएगा। जलकुंभी कचरा निकालकर तालाब को पुर्नजीवित करने के भागीरथी अभियान से सभी लोग जुड़ रहे हैं।संजेश नायक, स्वच्छता निरीक्षक