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छत्तीसगढ़ के इस गांव के लोग मरना क्यों चाहते हैं.. 11 ने की कोशिश, 3 की मिली लाश

Suicide Case: छत्तीसगढ़ के इंदागांव में लगातार हो रही आत्महत्याओं ने प्रशासन और गांववालों चिंता बढ़ा दी है। बीते 20 दिनों में तीन मौतें और आठ आत्महत्या के प्रयास हुए हैं..

गरियाबंदMar 29, 2025 / 01:38 pm

Khyati Parihar

क्यों चर्चा में है छत्तीसगढ़ का यह गांव, 20 दिन के भीतर 11 ने की आत्महत्या की कोशिश, 3 मरे... मौत बनी पहेली
Suicide Case: मैनपुर/कोपरा इलाके में मौत पिछले एक माह से तांडव मचा रही है। मैनपुर से देवभोग जाने वाले रोड पर बसे इंदागांव में 20 दिन में 3 लोगों ने खुदकुशी की। 11 और भी फांसी लटकने जा रहे थे, जिन्हें परिवार ने रोका। सुसाइड की कोशिश करने वालों का कहना है कि घर की मियार पर उन्हें काली रस्सी नजर आती है। इसके बाद बस मरने का जी करता है। इधर, छुरा ब्लॉक के फुलझर गांव में भी महीनेभर में 8 लोगों की अकाल मौत हो गई।
लोग इन घटनाओं के पीछे देवी-देवताओं का कोप और भूत बाधा जैसे एंगल देख रहे हैं। दोनों गांव में इसके लिए बकायदा शांति पूजा समेत विविध अनुष्ठान भी करवाए गए हैं। हालांकि, पड़ताल में पता चला कि मरने और मरने की कोशिश करने वाले कुल 22 में 80 प्रतिशत मतलब 18 लोग हैवी ड्रिंकर रहे हैं। शराब में भी महुआ। यूरिया वगैरह मिलाने से यह ऐसे ही घातक हो जाता है। सबसे पहले बात इंदागांव की क्योंकि यहां खुदकुशी की कोशिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
सोमवार को एकसाथ तीन युवक खुदकुशी पर अड़ गए थे। रविवार को भी एक युवक ने इसी तरह की हरकत की थी। अब तो हालत ये है कि जवान लड़का खोने के डर से मां-बाप सारी-सारी रात जगकर निगरानी कर रहे हैं। कुछ निगरानी करने वाले रस्सी पर लटक चुके अपने बच्चों को बचाने में कामयाब रहे। जबकि निगरानी न कर पाने वाले जिन अभिभावकों ने बच्चा गंवाया है, उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।

23 लोग शराब, सूखे नशे के आदी, री-हैब भेज सकते हैं

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे ने फुलझर में हैल्थ कैंप लगवाया। और किसी को गंभीर बीमारी तो नहीं, यह देखा। अभी 5 दिन से इंदागांव में भी 10 सदस्यीय स्पर्श टीम को भेजकर हैल्थ कैंप लगवाया जा रहा है। खुदकुशी की कोशिश करने वालों के अलावा भी टीम गांव के बाकी घरों में जाकर लोगों की काउंसिलिंग कर रही है।
इस दौरान टीम ने 23 ऐसे व्यक्तियों के समूह को आइडेंटिफाई किया है, जो शराब या सूखे नशे के आदी हैं। शराब में महुआ और सूखे नशे में मुनक्का/अंटा खाने वाले इन लोगों में बहुत डिप्रेशन और अग्रेसन नोटिस किया गया है। टीम की कोशिश है कि गांव में नियमित उपचार और काउंसिलिंग के जरिए इन्हें सामान्य जिंदगी में वापस लाया जा सके। बात नहीं बनी, तो कलेक्टर की मंजूरी से इन्हें री हैब भी भेजा जा सकता है।
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ये आस्था की बात है… पिछले साल मड़ई नहीं, इस बार होगा

इंदागांव में एकाएक खुदकुशी करने वालों की बाढ़ आने के बाद इसे क्षेत्र के देव मड़ई से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चूंकि पूरा इलाका आदिवासी बहुल है, इसलिए यहां हर गांव के अपने देवी-देवता हैं। इंदागांव में बुढ़ी दाई प्रमुख हैं। इनके अलावा आसपास के 20-22 गांवों के देवी-देवता भी इंदागांव के मड़ई में शामिल होते हैं। पिछले साल गांववालों ने मड़ई की जगह पहरी का आयोजन किया था। इसके तहत 3 दिन राम-नाम का जाप किया गया।
इस बार भी मड़ई को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना था, लेकिन गांव में खुदकुशी की बढ़ती कोशिशों के बाद तय हुआ है कि इस साल देव मड़ई हर हाल में कराया जाएगा। चूंकि यह लोगों की आस्था और रीति-रिवाजों से जुड़ा मामला है, इसलिए स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसमें सहयोग के लिए बढ़-चढ़कर आगे आ रहे हैं।

फुलझर गांव में मरने वाले 8 में से 6 लोग महुआ शराब पीने वाले थे

खुदकुशी की कोशिश में बचे 11 के अलावा जान गंवाने वाले 3 लोगों की बात करें तो इनमें भी 2 आदतन महुआ शराब पीने वाले थे। इसी तरह फुलझर में 8 मौतों की पड़ताल में पता चला कि इनमें से 6 लोग महुआ शराब पीने वाले थे। उस पर किसी को कैंसर था, तो कोई हार्ट पेशेंट था। जो 2 लोग शराब नहीं पीते थे, उनकी मौत की वजह गंभीर बीमारी बताई जा रही है।

जिले मेें सबसे ज्यादा शराब मैनपुर, देवभोग में ही पकड़ी जाती है

जिले में शराब की अवैध बिक्री के मामले में भी मैनपुर, देवभोग आगे हैं। गरियाबंद एएसपी जितेंद्र चंद्राकर से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जिले में इस साल जनवरी से लेकर अब तक 1278 लीटर शराब पकड़ी गई है। इसमें सबसे ज्यादा शराब मैनपुर ब्लॉक से है। यहां से लगे ओडिशा बॉर्डर में ही 300 लीटर के करीब अवैध शराब पकड़ी गई। जिले में पुलिस लगातार नाकेबंदी और चेक पोस्ट के जरिए शराब की अवैध धंधे पर नकेल कस रही है।
कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल और एसपी निखिल राखेचा के कड़े निर्देशों के बाद इसे लेकर मुखबिरों का नेटवर्क भी मजबूत किया गया है। अब शराब के साथ इसे पीकर खुदकुशी के लिए निकलने वाले सिरफिरों को रोकना पुलिस-प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है।

टॉपिक एक्सपर्ट

शराब मानसिक संतुलन बिगाड़ देता है। इससे कई बार लोग सुसाइड कर लेते हैं या सुसाइड की कोशिश करते हैं। अस्पताल में ऐसे काफी केस आते हैं। शराब और सूखे नशे से दूरी बनाकर स्वस्थ रहा जा सकता है। – डॉ. सुरभि दुबे, एसोसिएट प्रोफेसर, पं. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर
हमने गांव में हैल्थ कैंप लगाया है। हमारी टीम काउंसिलिंग के जरिए लोगों को समझाने की कोशिश कर रही है। स्थिति काबू में नहीं आती है, तो नशे के आदी लोगों को समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित डी-एडिक्शन सेंटर भेजने की प्लानिंग है। इसके लिए पहले कलेक्टर से अनुमति लेेंगे। – डॉ. गार्गी यदु, सीएमएचओ, गरियाबंद

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