औद्योगीकरण की अपार संभावना
उन्होंने कहा कि “कई कठिनाइयों और प्रणालीगत बाधाओं” के बावजूद उनकी सकारात्मक ऊर्जा देखना उत्साहजनक है। वे बोले, “यह क्षेत्र मानव और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, फिर भी यह उपेक्षित पिछड़े क्षेत्र जैसा लगता है। औद्योगीकरण की अपार संभावनाओं के बावजूद, यहां के लोग अवसरों की उपेक्षा महसूस करते हैं। युवाओं में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या गंभीर है। एनईपी 2020 के कार्यान्वयन की बड़ी मांग है।
अवसरों से वंचित होने की भावना
राज्यपाल ने जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार की कठोर दो भाषा नीति के कारण इस क्षेत्र के युवा पड़ोसी राज्यों के युवाओं की तुलना में अवसरों से काफ़ी वंचित महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि दुर्भाग्य से हिंदी के विरोध के नाम पर उन्हें कोई अन्य दक्षिण भारतीय भाषा भी पढ़ने की अनुमति नहीं है। यह वास्तव में अनुचित है। हमारे युवाओं के पास भाषा सीखने का विकल्प होना चाहिए।
हमें भाषाई आत्मीयता का ज्ञान नहीं दें राज्यपाल : DMK
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, कानून मंत्री एस रेगुपति ने रवि से कहा कि वे “तमिलों को उनकी भाषा आत्मीयता के बारे में शिक्षा न दें।” राज्यपाल के पिछले विवादों का स्पष्ट संदर्भ देते हुए मंत्री ने कहा, ” वे तमिल, तमिलनाडु और तमिल थाई वाळथु (राज्य गान) के खिलाफ़ बार-बार नफ़रत फैला रहे हैं।”उन्होंने आरोप लगाया, “अर्थव्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में तमिलनाडु द्वारा की गई प्रगति को बर्दाश्त न कर पाने के कारण राज्यपाल रवि राज्य के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।” मंत्री ने पूछा कि क्या रवि बता सकते हैं कि दक्षिण तमिलनाडु किस क्षेत्र में पिछड़ रहा है? उनका दावा था कि तमिलनाडु ने अन्य भारतीय राज्यों के मुकाबले शिक्षा, चिकित्सा और अर्थव्यवस्था में “अतुलनीय” प्रगति की है, जो केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से स्पष्ट है। ये उपलब्धियां तमिलनाडु की दो-भाषा नीति के कारण संभव हुईं। रेगुपति ने पूछा, क्या तमिलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के माध्यम से हिंदी थोपने की आधिपत्यवादी लोगों की योजनाओं के बारे में पता नहीं है?” भाषा अध्ययन के विकल्प को लेकर राज्यपाल के विचार पर वे बोले, “हम जानते हैं कि क्या विकल्प है और क्या थोपना है? इस तरह का नाटक यहां नहीं चलेगा।”