परंपरागत शिक्षा ग्रहण करने वाले इन विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर प्लेसमेंट की संभावनाएं न के बराबर हैं। बाहर की कंपनियां आती भी हैं तो वे युवाओं को बाहरी राज्यों में जाकर काम करने के लिए जॉब ऑफर करती हैं। कम वेतन में बाहर रहकर काम करना युवाओं को रास नहीं आता। ऐसे में अब तक उनके हाथ निराशा ही लगी है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने रोजगारोन्मुखी शिक्षा को लेकर पाठ्यक्रम प्रारंभ भी किए हैं, लेकिन विद्यार्थियों ने इसमें रुचि नहीं ली। वहीं महाविद्यालयों में तकनीकी व स्किल बेस्ड शिक्षा के लिए कोई पाठ्यक्रम प्रारंभ नहीं हो पाया है।
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जिले के महाविद्यालयों में सेवा दे रहे प्राध्यापकों की मानें तो पुराने पाठ्यक्रमों में प्लेसमेंट की संभावनाएं बहुत कम हैं। कंपनियों में नौकरियां तो हैं, लेकिन उन्हें ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो नई तकनीकों से अपडेट हों। पुराने पाठ्यक्रमों पर आधारित शिक्षा के अनुरूप कंपनियों में मांग कम रह गई है।
शॉर्ट-टर्म कोर्स में भी प्रवेश नहीं ले रहे छात्र
नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए पं. एसएन शुक्ल विश्वविद्यालय में कई शॉर्ट-टर्म कोर्स प्रारंभ किए गए हैं, लेकिन इनमें विद्यार्थियों की रुचि न के बराबर है। कुछ पाठ्यक्रमों में तो प्रवेश ही नहीं हुआ, जबकि अन्य में गिने-चुने विद्यार्थी ही पहुंचे हैं। रोजगारोन्मुखी शिक्षा को लेकर जागरूकता के अभाव के चलते विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों को नहीं अपना रहे हैं। ये भी पढ़े –
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स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के कुछ तकनीकी और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की स्थिति बेहद खराब है। बीएससी इलेक्ट्रॉनिक्स में 80 सीटों के मुकाबले केवल 1 छात्र ने प्रवेश लिया है। एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स की 60 सीटों में केवल 7, एमएससी फिजिक्स की 90 सीटों में 6, और यूजिक तबला में 50 सीटों के मुकाबले केवल 3 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।
डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की स्थिति और भी चिंताजनक है। डीसीए और ग्राफिक्स डिजाइन कोर्स में 60 सीटों में सिर्फ 6 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। साइबर सिक्योरिटी में 2, वेब डिजाइनिंग और ऑफिस ऑटोमेशन में 0, कंप्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग में 0, सोलर पावर प्लांट में 0, और एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में भी कोई प्रवेश नहीं हुआ है।
स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में भी यही स्थिति देखने को मिली है। स्पोकन इंग्लिश एंड कंटेंट राइटिंग में 60 में से केवल 1 विद्यार्थी ने प्रवेश लिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में 2, जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में 2, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में 0, डिजास्टर मैनेजमेंट में 0, बायोइन्फॉर्मेटिक्स में 0, और ट्राइबल कल्चर एंड डेवलपमेंट मैनेजमेंट में भी किसी ने प्रवेश नहीं लिया है।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत
विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा की उपलब्धता के बावजूद विद्यार्थी पारंपरिक कोर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में तकनीकी पाठ्यक्रमों की ओर युवाओं को आकर्षित करने के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत है। स्थानीय स्तर पर प्लेसमेंट बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तालमेल बैठाना आवश्यक होगा। जागरूकता और सही मार्गदर्शन के अभाव में युवा उन कोर्सों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जो उनके रोजगार के लिए अधिक कारगर साबित हो सकते हैं।